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09 अगस्त: भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक रक्षाबंधन आज, भद्रा से मुक्त इन 09 दुर्लभ योगों में मनाया जाएगा रक्षाबंधन पर्व

अगस्त का महीना है। आज 09 अगस्त को भाई बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन का त्योहार है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र भद्रा रहित और शुभ मुहूर्त में बांधना चाहिए। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष सावन मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है। रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।‌ इस बार रक्षा बंधन आज 09 अगस्त को है।

आज रक्षाबंधन का पर्व

रक्षा बंधन का पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है। भारतीय परम्पराओं का यह एक ऐसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है। इस लिये यह पर्व भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ साथ सांस्कृतिक, सामाजिक महत्व भी रखता है। साथ ही राखी भाई के दाहिने हाथ में बांधी जाती है। हिंदू धर्म में दाहिना हाथ शुभता का प्रतीक माना जाता है‌। किसी भी पूजा-पाठ या धार्मिक कर्मकांड आदि में हमेशा दाहिने हाथ का प्रयोग किया जाता है। जब कोई पंडित यज्ञ कराता है या पूजा करवाता है, तो वह भी व्यक्ति को दाहिने हाथ से आहुतियां देने को ही कहता है। यही वजह है कि राखी जैसा पवित्र सूत्र भी भाई के दाहिने हाथ पर बांधा जाता है।

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। जो दोपहर के 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। हिंदू पंचांग के मुताबिक, सावन पूर्णिमा पर भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त होगी। भद्रा 8 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 9 अगस्त को सुबह 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 5 बजकर 47 मिनट से दोपहर 2 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।
सौभाग्य योग- सुबह प्रात:काल से लेकर 10 अगस्त को तड़के 2 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
शोभन योग- 10 अगस्त को सुबह 2 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
लाभ काल- प्रातः 10:15 से दोपहर 12:00 बजे।
अमृत काल-दोपहर 1:30 से 3:00 बजे।
चर काल- सायं 4:30 से 6:00 बजे।

जानें रक्षाबंधन पर्व का महत्व

राखी पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार एक बार देवताओं और असुरों में युद्ध आरंभ हो गया था। जिसमें देवताओं को हार की स्थिति समझ आ रही थी। तब इंद्र की पत्नी इन्द्राणी ने देवताओं के हाथ में रक्षा कवच बांधा। जिससे देवताओं की विजय हुई। माना जाता है कि यह रक्षा विधान श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर ही शुरू किया गया था।

जानें रक्षाबंधन पर्व का इतिहास

रक्षाबंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। हिंदू पुराण कथाओं के अनुसार, महाभारत में, (जो कि एक महान भारतीय महाकाव्‍य है) पांडवों की पत्‍नी द्रौपदी ने भगवान कृष्‍ण की कलाई से बहते खून (श्री कृष्‍ण ने भूल से खुद को जख्‍मी कर दिया था) को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था। इस प्रकार उन दोनो के बीच भाई और बहन का बंधन विकसित हुआ था, तथा श्री कृष्‍ण ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था।

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