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10 जून: आज है ज्येष्ठ वट पूर्णिमा व्रत, सुहागिन महिलाएं रखती है व्रत, बरगद के पेड़ की करें परिक्रमा, जीवन में आएगी खुशहाली

आज 10 जून 2025 है। आज वट पूर्णिमा व्रत है। वट सावित्री व्रत साल में दो बार रखा जाता है। पहली बार ज्येष्ठ अमावस्या पर और दूसरी बार पूर्णिमा के दिन। सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को रखती है। इस बार दूसरे ज्येष्ठ अमावस्या के दिन यानी 10 जून को वट पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा।

वट पूर्णिमा व्रत आज

आज वट पूर्णिमा का व्रत किया जा रहा है। ग्रंथों में इस व्रत को सौभाग्य और समृद्धि देने वाला बताया है। भविष्य और स्कंद पुराण के मुताबिक ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत किया जाता है। इस दिन बरगद के पेड़ के नीचे भगवान शिव-पार्वती के बाद सत्यवान और सावित्री की पूजा की जाती है। साथ ही यमराज को भी प्रणाम किया जाता है। अपने पति की लंबी उम्र के लिए शादीशुदा महिलाएं ये व्रत करती हैं।

जानें शुभ मुहूर्त

इस वर्ष 2025 में यह पर्व विशेष रूप से उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में श्रद्धा से मनाया जाता है। इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जून को सुबह 11:35 बजे से होगी और इसका समापन 11 जून को दोपहर 1:13 बजे पर होगा। व्रत 10 जून को रखा जाएगा, जबकि स्नान और दान 11 जून को किए जाएंगे।
📌📌वट पूजा मुहूर्त: सुबह 8:52 से दोपहर 2:05 तक रहेगा।
📌📌स्नान और दान का समय: सुबह 4:02 से 4:42 तक रहेगा।
📌📌चंद्रोदय: शाम 6:45 बजे तक रहेगा।

जानें पूजा विधि

वट पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठने और स्नान आदि के बाद सुहागन महिलाएं पूजा के लिए अपनी थाली में रोली, चंदन, फूल, धूप, दीप आदि सब रख लें। इसके बाद सभी सामग्री वट वृक्ष पर अर्पित कर दें। साथ ही कच्चे सूत स वट की परिक्रमा करें। इसके बाद वट वृक्ष के नीचे बैठकर सत्यवान सावित्री की कथा पढ़ें। इस व्रत का पारण अगले दिन सात चने के दाने और पानी के साथ किया जाता है।

जानें इसका महत्व

सनातन धर्म में पूर्णिमा का दिन देवी-देवताओं का दिन कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है। मानसिक तनाव, चिंताएं और परेशानियां दूर होती हैं। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा का भी विधान है साथ ही रात में देवी लक्ष्मी की पूजा से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। कहा जाता है कि इसी तिथि पर भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज में गोपियों संग रास रचाया था, जिसे महारास के नाम से जाना जाता है।

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