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11 जुलाई: आज आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का छठा दिन, मां त्रिपुर भैरवी की पूजा का विधान, जलाएं यह दीपक

आज 11 जुलाई 2024 है। आज आषाढ माह की गुप्त नवरात्रि का छठा दिन हैं। 11 जुलाई 2024 षष्ठी तिथि के दिन मां त्रिपुर भैरवी की पूजा होगी। हिंदू धर्म में नवरात्रि को सनातन धर्म का सबसे पवित्र और ऊर्जादायक पर्व माना जाता है। सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं जो माघ, चैत्र, आषाढ़, अश्विन (शारदीय नवरात्रि) मास में होती हैं। जिसमें से दो गुप्त और दो सार्वजनिक होती हैं। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में तंत्र साधना करने वाले लोग माँ भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी, फल उतना ही सुखदायी होगा। मान्यता है कि भक्त  आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की उपासना करते हैं उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है ।

सरसों का जलाएं दीपक

गुप्त नवरात्रि के छठे दिन त्रिपुर भैरवी माता की पूजा की जाती है‍। साथ ही उनके सामने सरसो तेल का दीपक जलाएं. ऐसा करने से लाभ हो सकता है।

जानें पौराणिक मान्यता

देवी त्रिपुर भैरवी को बंदीछोड़ माता भी कहा गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से सभी प्रकार के कानूनी मामलों और कारावास आदि से मुक्ति मिलती है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार त्रिपुर भैरवी के उग्र स्वरूप की कांति हजारों उगते सूर्य के समान है। धार्मिक कथाओं में इस बात का वर्णन है कि माता त्रिपुर भैरवी की उत्पत्ति महाकाली के छाया विग्रह से ही हुई है। देवी भागवत के अनुसार छठी महाविद्या त्रिपुर भैरवी हैं। मां त्रिपुर भैरवी के विभिन्न प्रकार के भेद माने गए हैं। सिद्ध भैरवी, चैतन्य भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, नित्या भैरवी, रूद्र भैरवी, भ्रद भैरवी आदि रूप माने जाते हैं।

इस तरह करें गुप्त नवरात्रि में पूजा अराधना

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा-पाठ के साथ अराधना करें। सुबह और संध्या पूजा के समय दुर्गा चालीसा अथवा दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें। पूजा के दौरान माता को लोंग व बताशे का भोग चढ़ाना चाहिए। इसके साथ मां को लाल पुष्प और चुनरी भी अर्पित करें। इससे माता जल्दी प्रसन्न हो जाती है। और आपके ऊपर अपनी कृपा बनाए रखती है।

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