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12 जुलाई: आज आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन, मां धूमावती की पूजा का विधान, जलाएं यह दीपक

आज 12 जुलाई 2024 है। आज आषाढ माह की गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन हैं। गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन मां धूमावती की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को सनातन धर्म का सबसे पवित्र और ऊर्जादायक पर्व माना जाता है। सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं जो माघ, चैत्र, आषाढ़, अश्विन (शारदीय नवरात्रि) मास में होती हैं। जिसमें से दो गुप्त और दो सार्वजनिक होती हैं। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में तंत्र साधना करने वाले लोग माँ भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी, फल उतना ही सुखदायी होगा। मान्यता है कि भक्त  आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की उपासना करते हैं उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है ।

घी का जलाएं दीपक

मान्यता के अनुसार विवाहित महिलाएं मां धूमावती की पूजा नहीं करती बल्कि दूर से ही मां के दर्शन करती है। गुप्त नवरात्रि की सप्तमी तिथि को धूमावती देवी के सामूहिक जप-अनुष्ठान और स्तोत्र का पाठ किया जाते हैं। मां धूमावती दसमहाविद्या में सातवीं विद्या है। शास्त्र रुद्रामल तंत्र में बताया गया है कि सभी 10 महाविद्या शिव की शक्तियां है।
तंत्र शास्त्र में धूमावती माता को महाविद्याओं में से एक माना जाता है। इनकी पूजा करने से मोक्ष और भौतिक संपदा मिलती है। मां धूमावती की पूजा में दीया जलाने का विशेष महत्व होता है। दीपक जलाने से देवी प्रसन्न होती हैं। माता धूमावती की पूजा के लिए घी का दीपक जला सकते हैं।

जानें पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब माता सती ने अपने पति भगवान शिव के अपमान होने के कारण अपने पिता राजा प्रजापति द्वारा आयोजित हवन कुंड में अपनी इच्छा अपने आप को जलाकर भस्म कर दिया था। माना जाता है कि तब उनके शरीर से जो धुआं निकला था उसी धुंए से मां धूमावती प्रकट हुई थी। अर्थात मां धूमावती धुंए के स्वरूप में माता सती का भौतिक रूप है। मां धूमावती को दुख दूर करने वाली देवी भी माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार यह भी बताया गया है कि दुर्भाग्य की देवी धूमावती मां लक्ष्मी की बड़ी बहन है। परंतु इनका स्वरूप मां लक्ष्मी से बिल्कुल उल्टा है। शास्त्रों के अनुसार मां धूमावती पीपल के पेड़ में निवास करती हैं। मान्यताओं के अनुसार धूमावती को दरिद्रता, अलक्ष्मी और ज्येष्ठा के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पाप, आलस्य, गरीबी, दुख और कुरूपता पर मां धूमावती का आधिपत्य रहता है।

इस तरह करें गुप्त नवरात्रि में पूजा अराधना

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा-पाठ के साथ अराधना करें। सुबह और संध्या पूजा के समय दुर्गा चालीसा अथवा दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें। पूजा के दौरान माता को लोंग व बताशे का भोग चढ़ाना चाहिए। इसके साथ मां को लाल पुष्प और चुनरी भी अर्पित करें। इससे माता जल्दी प्रसन्न हो जाती है। और आपके ऊपर अपनी कृपा बनाए रखती है।

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