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14 सितंबर: परिवर्तिनी एकादशी आज, भगवान श्रीहरि की उपासना का विधान, दान पुण्य का खास महत्व

आज 14 सितंबर है। आज परिवर्तिनी एकादशी है।  धार्मिक मान्यताओं में एकादशी को विशेष महत्व होता है। हर महीने दो और हर साल 24 एकादशी आती हैं। एकादशी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत भी रखा जाता है। आज परिवर्तिनी एकादशी है।

जानें शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग अनुसार परिवर्तिनी एकादशी तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को रात 10 बजकर 31 मिनट से होगी और और इसका अंत 14 सितंबर को रात 8 बजकर 42 मिनट पर समाप्‍त होगा। इसलिए उदया तिथि को आधार मानते हुए परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा। पंचांग के मुताबिक परिवर्तनी एकादशी पर रवि योग सुबह 06 बजकर 10 से रात्रि 08 बदकर 31 तक रहेगा। वहीं इसके बाद सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू हो जाएगा।

जानें एकादशी पूजन-विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ में उपासना करें। प्रभु का जलाभिषेक करें। फिर पीला चंदन, पीले फूल, पीला फल, तुलसी दल चढ़ाएं। व्रत रखा है तो एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद घी के दीपक की विष्णु जी और लक्ष्मी जी की आरती करें। भगवान को मिठाई और फल का भोग अर्पित करें और पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती जरूर करें।‌ अंत में क्षमा प्रार्थना करें। अगले दिन प्रभु की पूजा करने के बाद व्रत का पारण करें। एकादशी व्रत के दिन दान-पुण्य को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस विशेष दिन पर जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और धन का दान जरूर करें।

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