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14 जुलाई: आज आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की अष्टमी, मां मातंगी की पूजा का विधान, जलाएं यह दीपक

आज 14 जुलाई 2024 है। आज आषाढ माह की गुप्त नवरात्रि का नवा दिन व अष्टमी हैं। इस बार गुप्त नवरात्रि दस दिन की है। जिसमें आज अष्टमी है। गुप्त नवरात्रि का नौवां दिन माता मातंगी को समर्पित हैं। ऐसी मान्यता है कि इंद्रजाल और जादुई शक्ति से छुटकारा पाने के लिए माता मातंगी की पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को सनातन धर्म का सबसे पवित्र और ऊर्जादायक पर्व माना जाता है। सनातन हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं जो माघ, चैत्र, आषाढ़, अश्विन (शारदीय नवरात्रि) मास में होती हैं। जिसमें से दो गुप्त और दो सार्वजनिक होती हैं। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में तंत्र साधना करने वाले लोग माँ भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी, फल उतना ही सुखदायी होगा। मान्यता है कि भक्त  आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की उपासना करते हैं उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है ।

सरसो का जलाएं दीपक

माता मातंगी शक्ति और समृद्धि की देवी कहा जाता है। इनकी पूजा के लिए गुप्त नवरात्रि के 9वें दिन सरसो तेल का दीपक जलाना चाहिए।

जानें पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ भगवान शिव और माता पार्वती से मिलने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे। भगवान विष्णु अपने साथ कुछ भोज्य सामग्री अपने साथ ले गए थे, जो उन्होंने भगवान शिव को भेंट की। जब भगवान शिव और माता पार्वती, भगवान विष्णु की भेंट स्वीकार कर रहे थे। तो उस दौरान भोजन का कुछ अंश धरती पर गिर गया। जिससे एक श्याम वर्ण वाली दासी ने जन्म लिया जो कि मातंगी नाम से जानी गई। कुछ अन्य कथाओं के अनुसार, ऋषि मतंग की पुत्री होने के कारण उनका नाम मातंगी पड़ा है। उन्हें भगवान विष्णु की आद्य शक्ति भी माना जाता है।

इस तरह करें गुप्त नवरात्रि में पूजा अराधना

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की विधिवत पूजा-पाठ के साथ अराधना करें। सुबह और संध्या पूजा के समय दुर्गा चालीसा अथवा दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें। पूजा के दौरान माता को लोंग व बताशे का भोग चढ़ाना चाहिए। इसके साथ मां को लाल पुष्प और चुनरी भी अर्पित करें। इससे माता जल्दी प्रसन्न हो जाती है। और आपके ऊपर अपनी कृपा बनाए रखती है।

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