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17 अगस्त: आज है स्वास्थ्य व समृद्धि का प्रतीक लोकपर्व घी संक्रांति, आज इस चीज का अवश्य करें सेवन

आज 17 अगस्त 2026 है। आज है उत्तराखंड का पर्व घी संक्रांति। घी संक्रांति (जिसे ओलगिया या घ्यू त्यार भी कहते हैं) उत्तराखंड का एक प्रमुख लोक पर्व है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद माह के पहले दिन (सिंह संक्रांति / मध्य अगस्त) मनाया जाता है, जो अच्छी फसल और पशुधन के स्वास्थ्य की ख़ुशी में प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करते हैं।

घी संक्रांति का धार्मिक महत्व

इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस मौके पर नदी स्नान करना बेहद शुभ फलदायी होता है। साथ ही दान-पुण्य के कार्यों के लिए भी ये दिन शुभ होता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार सिंह संक्रांति पर घी का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर उड़द की दाल से भरी बेड़ू/बेड़वा रोटी बनाई जाती है, जिसे घी या मक्खन के साथ खाया जाता है।

जाने पौराणिक मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, सिंह संक्रांति के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त, भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह का नारियल पानी और दूध से अभिषेक करने का भी विधान है। इतना ही नहीं, सिंह संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान आदि कार्यों से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

सिंह संक्रांति


वर्ष 2026 में सिंह संक्रांति 17 अगस्त 2026 (सोमवार) को है। इस दिन सूर्य देव प्रातः 07:59 बजे कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे।

जानें घी खाने की परंपरा

सिंह संक्रांति या सूर्य संक्रांति के दिन पूजा-पाठ, स्नान- ध्यान और दान-पुण्य के साथ-साथ घी खाने का महत्व है। आयुर्वेद में चरक संहिता के अनुसार गाय का घी बेहद शुद्ध और पवित्र होता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी जातक सूर्य संक्रांति के दिन घी का सेवन करता है, उसके यादाश्त, बुद्धि, बल, ऊर्जा और ओज में वृद्धि होती है। इसके अलावा गाय का घी वसा वर्धक है, जिसे खाने से व्यक्ति को वात, कफ और पित्त दोष जैसी परेशानियां नहीं होती हैं। गाय का घी हमारे शरीर से विषैले पदार्थ को बाहर निकाल देता है। सिंह संक्रांति के दौरान लगभग 1 महीने के इस समय में रोज़ाना सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सूर्य संक्रांति के दिन घी नहीं खाता, तो अगले जन्म में वह घोंघे के रूप में जन्म लेता है। यही कारण है कि सूर्य संक्रांति के दिन घी खाने का विशेष महत्व बताया गया है।

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