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19 अगस्त: भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक रक्षाबंधन आज, जानें इससे जुड़ा इतिहास व महत्व

अगस्त का महीना है। आज 19 अगस्त को भाई बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन का त्योहार है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र भद्रा रहित और शुभ मुहूर्त में बांधना चाहिए। हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष सावन मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है। रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।‌ इस बार रक्षा बंधन आज 19 अगस्त को है।

आज रक्षाबंधन का पर्व

रक्षा बंधन का पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है। भारतीय परम्पराओं का यह एक ऐसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है। इस लिये यह पर्व भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ साथ सांस्कृतिक, सामाजिक महत्व भी रखता है।

जानें शुभ मुहूर्त

19 अगस्त की सुबह 8.50 बजे तक श्रवण नक्षत्र है। सुबह 8.51 बजे से घनिष्ठा नक्षत्र लग जाएगा। सौभाग्य योग सुबह 5.53 बजे तक है। इसके बाद शोभन योग लग जाएगा। दोपहर 1.24 बजे तक भद्रा है। ऐसे में भद्रा खत्म होने के बाद दोपहर 1.25 बजे से राखी बांधी जाएगी। उक्त तिथि पर सिंह राशि में सूर्य व शुक्र, वृष राशि में मंगल व गुरु संचरण करेंगे। जो शुभ संयोग है।

जानें रक्षाबंधन पर्व का महत्व

राखी पर्व से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। जिसके अनुसार एक बार देवताओं और असुरों में युद्ध आरंभ हो गया था। जिसमें देवताओं को हार की स्थिति समझ आ रही थी। तब इंद्र की पत्नी इन्द्राणी ने देवताओं के हाथ में रक्षा कवच बांधा। जिससे देवताओं की विजय हुई। माना जाता है कि यह रक्षा विधान श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर ही शुरू किया गया था।

जानें रक्षाबंधन पर्व का इतिहास

रक्षाबंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। हिंदू पुराण कथाओं के अनुसार, महाभारत में, (जो कि एक महान भारतीय महाकाव्‍य है) पांडवों की पत्‍नी द्रौपदी ने भगवान कृष्‍ण की कलाई से बहते खून (श्री कृष्‍ण ने भूल से खुद को जख्‍मी कर दिया था) को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था। इस प्रकार उन दोनो के बीच भाई और बहन का बंधन विकसित हुआ था, तथा श्री कृष्‍ण ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था।

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