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21 मार्च: अंतरराष्ट्रीय वन दिवस आज, प्रकृति का दिया उपहार है वन और पेड़, न‌ करें दुरूपयोग, एक साथ मिलकर बचाने के लिए दें अपना योगदान

आज 21 मार्च 2026 है। आज अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य सभी तरह के वनों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करना है। साथ ही वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के हित को ध्यान में रखते हुए वन और वनों के पेड़ों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है।

जानें इसका इतिहास

यूरोपियन कॉन्फेडरेशन ऑफ एग्रीकल्चर की 23वीं महासभा ने 1971 में विश्व वानिकी दिवस की स्थापना की। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने भी तय किया कि यह 21 मार्च को वार्षिक रूप से मनाया जाएगा।बाद में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन ने भी पेड़ों के महत्व के विषय में लोगों को जागरूक करने के लिए 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘विश्व वानिकी दिवस’ मनाने पर अपनी सहमति दी, तभी से 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘विश्व वानिकी दिवस’ मनाने की शुरुआत हुई।

वनों का विनाश, बीमारियों को दे रहा दावत

हम अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तेजी जंगलों पर अतिक्रमण कर उनका विनाश कर रहे हैं। देखा जाए तो जंगलों का तेजी से होता विनाश और वन्यजीवों के साथ हमारा अनुचित व्यवहार इस तरह की बीमारियों के खतरे को और दावत दे रहा है।डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में फैलने वाली हर तीन में से एक नई बीमारी भूमि उपयोग और जंगलों के विनाश से जुड़ी है। देखा जाए तो यह संक्रामक बीमारियां गरीब और कमजोर देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण है। साथ ही पांच वर्ष से छोटे बच्चों की मृत्यु के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार है। इबोला इसका एक अच्छा उदाहरण है जहां अन्य कारकों की तुलना में वन विनाश को 60 फीसदी जिम्मेवार माना गया है।

प्रकृति का उपहारों मत करों इनका विनाश

आज मानव ने अपनी पूर्ति के लिए जंगलों का नाश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसी का असर है कि आज जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वॉर्मिंग, ग्लेशियर का पिघलना जैसी बड़ी समस्याएं बढ़ते ही जा रही है।वनों द्वारा निभाए गए कार्यों को कम करके आंका नहीं जा सकता है। वनों के कई मूल्यों के बावजूद, वे लगातार पृथ्वी के मुख से गायब हो रहे हैं।अपने लाभ के लिए मनुष्य द्वारा विकास के नाम पर कई ऐसे अविष्कार भी कर दिए गये हैं जो जल, जंगल, जमीन में जहर घोल रहे हैं। प्रकृति के उपहारों का ऐसा दुरूपयोग किया कि धरती, आकाश, पाताल जहां से मिल सकता था उसे लेने में कोई कसर बाकी न रखी। वैज्ञानिकों द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रकृति से अधिकतम पदार्थ प्राप्त कर लेने की इच्छा खत्म नहीं हो रही। अगर हमने अपनी प्रकृति को बचाने में ध्यान नहीं दिया तो समस्त जीव जंतु खतरे में पड़ जाएंगे। जिस तरह मनुष्य प्रकृति का नाश कर रहा है ये गलती उसी पर भारी पड़ेगी क्योंकि प्रकृति कहीं ना कहीं से अपना बदला जरूर लेगी।किसी वयस्क व्यक्ति को जिंदा रहने के लिए जितनी ऑक्सीजन की जरूरत है, वह उसे 16 बड़े-बड़े पेड़ों से मिल सकती है। लेकिन पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से उनकी संख्या दिनों दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। हमें जंगलों के साथ भी एक बच्चा समझकर पेश आना होगा जिस प्रकार एक बच्चे के पालन पोषण में कई समय लग जाता है,  ठीक उसी प्रकार जंगलों को भी बसाने में भी। उसमे निवास करने वाले जीवों के साथ हमें अपना समझकर व्यवहार करना होगा और जंगलों को बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर एक लड़ाई लड़नी होगी वरना आने वाली पीढ़ी जीव- जंतुओं और जंगलों को केवल किताब और कहानियों तक ही देख सकेगी।

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