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27 जुलाई: ‘मिसाइलमैन’ और ‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में लोकप्रिय हुए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि, छात्रों और युवाओं को प्रेरणा देती है उनकी जीवनगाथा

आज 27 जुलाई 2025 है। आज एयरोस्पेस वैज्ञानिक, शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है। एपीजे अब्दुल कलाम एक महान वैज्ञानिक और विचारक थे। इनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था।

‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में हुए लोकप्रिय

उन्होंने अपनी दृढ़ता, विनम्रता और दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता से लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनकी जीवनगाथा आज भी, खासकर छात्रों और युवाओं में, आशा और दृढ़ संकल्प की भावना जगाती है, और उन्हें निडर होकर ज्ञान प्राप्त करने और समर्पण भाव से राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रोत्साहित करती है। जब एपीजे अब्दुल कलाम ने देश के सर्वोच्च पद यानी 11वें राष्ट्रपति की शपथ ली थी तो देश के हर वैज्ञानिक का सर फख्र से ऊंचा हो गया था। वे ‘मिसाइलमैन’ और ‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में लोकप्रिय हुए।

मिसाइलमैन के नाम से भी थे प्रसिद्ध

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रसिद्ध वैज्ञानिक, जिन्हें दुनिया मिसाइलमैन के नाम से भी जानती है। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम तमिलनाडु में हुआ था। कलाम अपने परिवार में काफी लाड़ले थे, लेकिन उनका परिवार छोटी-बड़ी मुश्किलों से हमेशा ही जूझता रहता था। उन्हें बचपन में ही अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो गया था। उस वक्त उनके घर में बिजली नहीं हुआ करती थी और वह केरोसिन तेल का दीपक जलाकर पढ़ाई किया करते थे। कलाम मदरसे में पढ़ने के बाद सुबह रामेश्वरम के रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर जाकर समाचार पत्र एकत्र करते थे। वहां से अखबार लेने के बाद शहर की सड़कों पर दौड़-दौड़कर उसका वितरण करते थे। बचपन में ही आत्मनिर्भर बनने की तरफ उनका यह पहला कदम था। एपीजे अब्दुल कलाम ने 2002-07 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। अब्दुल कलाम भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जो कुंवारे और शाकाहारी थे। 25 जुलाई 2002 को उन्होंने संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। 25 जुलाई 2007 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का 27 जुलाई 2015 को शिलांग के आईआईएम में एक व्याख्यान देने के दौरान गिरने के बाद निधन हो गया था। उनके निधन पर पूरे देश में शोक व्यक्त किया गया और वैज्ञानिक प्रगति और शैक्षिक सशक्तिकरण के अथक प्रयासों में बिताए गए उनके जीवन को श्रद्धांजलि दी गई।

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