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चमोली में यूनेस्को धरोहर ‘रम्माण’ का भव्य आयोजन, मुखौटा नृत्य देख मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

चमोली: विकासखंड जोशीमठ (ज्योतिर्मठ) के सलूड़-डुंग्रा गांव में विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेले का आयोजन हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। जो भव्य रूप से संपन्न हो गया है।

बड़ी संख्या में उमड़े लोग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मेले में हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की और भूमियाल देवता से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया। कलाकारों ने बिना बोले पारंपरिक मुखौटों में रामायण के प्रसंगों (राम जन्म, सीता हरण, लंका दहन) का सजीव मंचन किया। ढोल-दमाऊ की थाप पर मोर-मोरनी, माल नृत्य और बण्या-बाणियांण नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि विधायक लखपत बुटोला ने रम्माण को क्षेत्र की विशिष्ट पहचान बताते हुए मेला कमेटी को 3 लाख रुपये और ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी ने 2.5 लाख रुपये देने की घोषणा की।

दुनियाभर में प्रसिद्ध

रम्माण मेला अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली के लिए दुनिया भर में विख्यात है, जिसमें पारंपरिक वाद्य यंत्रों और कलाकृतियों का विशेष महत्व रहता है।‌ आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा आठवीं सदी में शुरू की गई यह परंपरा आज भी जीवंत है। 2009 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया गया था।

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