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आस्था के पथ पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब: नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा: जयकारों और देव धुनों के बीच 7वें पड़ाव चेपड़ो पहुंचीं नंदा देवी

उत्तराखंड: उत्तराखंड में हिमालयी महाकुंभ के रूप में विख्यात मां नंदा की ‘बड़ी जात यात्रा’ जारी है। उत्तराखंड के चमोली में आयोजित हो रही ऐतिहासिक ‘श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा’ की तीनों देव डोलियां (जिन्हें स्थानीय तौर पर और बोलचाल में ‘तीनों डोलियां’ कहा जाता है) अपने अगले पड़ावों की ओर निरंतर बढ़ रही हैं।

भक्तिमय हुआ क्षेत्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश धाम के लिए शुरू हुई ‘श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा’ में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। यात्रा में शामिल माँ नंदा की तीनों देव डोलियां भव्य स्वागत के बीच अपने-अपने पड़ाव पर आगे बढ़ रही हैं। यात्रा मार्ग, गांवों और कस्बों में श्रद्धालुओं द्वारा देव डोलियों का भव्य और पारंपरिक स्वागत किया जा रहा है। भक्तों ने काकड़ी, मुगरी, कलेऊ और खाजा सहित स्थानीय स्तर पर उत्पादित अन्य सामग्री भेंट और पवाड़ा के रूप में माँ नंदा को अर्पित की जा रही है। इस दौरान देव डोलियों के साथ चल रहे चार सींगों वाले ‘चौसिंगा खाड़ू’ भी भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

अपार श्रद्धा व उत्साह

कुरुड़ से एक साथ निकलीं माँ नंदा की तीनों डोलियां—बधाण, दशोली और बंड—अपने-अपने निर्धारित पैदल मार्गों से आगे बढ़ते हुए लगातार पड़ावों को पार कर रही हैं। पूरे यात्रा मार्ग पर भक्तों द्वारा पुष्प वर्षा, पूजा-अर्चना और पौराणिक लोकगाथा (पवाड़ा) गाकर उत्सव का माहौल बना हुआ है। सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू हुई श्री नंदा देवी लोकजात यात्रा अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ लगातार आगे बढ़ रही है। नंदा देवी की उत्सव डोली माता के जयकारों और पारम्परिक देव धुनों के बीच अपने 7वें पड़ाव चेपड़ो गांव पहुंच गई है। यात्रा मार्ग और थराली बाजार में स्थानीय श्रद्धालुओं, विशेषकर ध्याणियों (बेटियों) ने पुष्प वर्षा और अक्षत बरसाकर यात्रा का भावुक और भव्य स्वागत किया। महिलाओं ने अश्रुपूरित आंखों से नंदा देवी को विदाई दी।

तीनों डोलियों की यात्रा की स्थिति

•  ​बधाण की डोली: बधाण क्षेत्र की नंदा देवी की उत्सव डोली थराली बाजार और सुहावने मौसम के बीच अपने 7वें पड़ाव चेपड़ो गांव पहुंची। यहां ध्याणियों (स्थानीय बेटियों) ने अश्रुपूरित आंखों से मां को विदाई दी। चेपड़ो में रात्रि जागरण व विशेष पूजा का आयोजन किया गया। हालांकि, शनिवार को कोठी गांव के बाद डोली के आगे के रूट को लेकर संशय जारी है।
• ​दशोली की डोली: दशोली क्षेत्र की डोली चौसिंगा खाड़ू (चार सींगों वाले पवित्र मेढ़े) की अगुवाई में कठिन चढ़ाई पार करते हुए अपने पड़ावों की ओर अग्रसर है। रास्ते भर श्रद्धालु इस खाड़ू व डोली की पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की मनौती मांग रहे हैं।
• ​बंड की डोली: बंड क्षेत्र की देव डोली भी अपने पारंपरिक पड़ावों—बटुला, दिगोली और नोरख गांव होते हुए निरंतर आगे बढ़ रही है। हर गांव में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा ढोल-दमाऊं की थाप पर डोली का भव्य स्वागत किया जा रहा है।

यात्रा का पड़ाव

चेपड़ो गांव पहुंचने पर नंदा देवी का भव्य स्वागत किया गया, जिसके बाद गांव में नंदा जागरण और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। शनिवार को यात्रा कोठी गांव पहुंचेगी। हालांकि, इसके बाद देव डोली किस रूट से आगे बढ़ेगी, इस पर संशय बना हुआ है। केंद्रीय समिति के अनुसार डोली ‘धरा तल्ला’ जाएगी, जबकि बड़ी जात समिति के अनुसार यात्रा ‘नंदकेसरी’ पहुंचेगी। मेला समिति कुरुड़ के अध्यक्ष नरेश गौड़ ने स्पष्ट किया कि चूंकि कुलसारी स्थित मंदिर में श्री यंत्र को विधि-विधान से नहीं खोला गया, इसलिए यह पूरी तरह सिद्ध होता है कि यह ‘लोकजात यात्रा’ ही है।
12 सितंबर: विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए रामणी आगमन, जहां विभिन्न देव डोलियों और छंतोलियों का भव्य मिलन होगा।

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