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एक मांं जिसने अपनी बेटी को खुद दिया इंसाफ, बेटी के रेपिस्ट और हत्यारे को भरी कोर्ट में मारी थी गोली

कोलकाता में ट्रेनी डाॅक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में देशभर में आक्रोश बना हुआ है। पूरे देजओ में लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच एक खबर काफी चर्चा में बनी हुई है।

एक माँ ने लिया बेटी की हत्या का बदला

यहां हम बात कर रहे हैं मैरिएन बाकमीयर की। जो जर्मनी के ल्यूबेक की रहने वाली थी। जिसने अपनी बेटी के हत्यारे को गोलियों से मार डाला। रिपोर्ट्स के मुताबिक मैरिएन बाकमीयर जर्मनी के लोअर सैक्सोनी में हिल्डेशाइम के छोटे से शहर सारस्टेड में पली बढ़ीं। उनका बचपन काफी मुसिबतों में बीता। 19 साल की उम्र में मैरिएन को एक शख्स से प्यार हुआ और दोनों ने शादी की। शादी के बाद एक उन्हें एक बेटी हुई। इसका नाम ऐना रखा गया। इसके बाद पति से तलाक हो गया तो ऐना ही उसकी जिंदगी बन गयी। वह नौकरी करती थी। इस वजह से बेटी घर में अकेली रहती थी। फिर तारिख आई 7 मई 1980। जब मैरिएन लौट कर आई तो सात साल की ऐना घर में नहीं मिली। जिसके बाद मैरिएन ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। पुलिस भी तलाशती रही लेकिन कुछ पता नहीं चला।

बेटी के हत्यारे को मारी गोली

रिपोर्ट्स के मुताबिक जिसके बाद पुलिस ने एक शख्स पर शक जताया। जो मैरिएन का पड़ोसी भी था। यह शख्स पहले यौन शोषण के मामले में जेल जा चुका था। पुलिस ने इस शख्स को उठाया और पूछताछ की। शुरुआत में तो वह झूठ बोलने लगा। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने बताया कि उसने बच्ची के दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया है। जिसके बाद यह मामला कोर्ट में गया। यहां आरोपी ने खुद को नपुंसक बता दिया। कई बार कोर्ट में सुनवाई हुई और हर बार ऐना की मां मैरिएन वहां जाती थीं। मैरिएन को लगा आरोपी कोर्ट को गुमराह कर रहा है। जिससे वह बैचेन हो गई। ऐसे में 6 मार्च, 1981 की तारीख को मैरिएन ने इंसाफ के लिए खुद को तैयार किया और कोर्ट रूम में पहुंच गईं। मैरीएन ने अपने पर्स से एक दशमलव 22 कैलिबर की बेरेटा पिस्टल निकाली और ग्रैबोस्की को गोली मार दी। फायरिंग में उसने कुल आठ गोलियां चलाई थी। आरोपी ग्रैबोस्की वहीं मर गया।

लोगों ने बताया हीरो

कोर्ट रूम में हत्या करने के बाद मैरिएन पर केस दर्ज किया गया और उसे छह साल की सजा सुनाई गई हालांकि तीन साल बाद उसे रिहा कर दिया गया। इस घटना के बाद मैरिएन को आम लोगों का खूब समर्थन मिला। बड़ी संख्या में लोग उसके समर्थन में एकत्रित हुए थे। उसे ‘हीरो’ बता रहे थे, जिसने अपनी बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या करने वालों को खुद ही सजा दे दी। रजेल से रिहा होने के बाद मैरिएन देश छोड़कर चली गई। साल 1996 में उसकी कैंसर से मौत हो गई‌। मौत के बाद उसे बेटी एना के बगल में ही दफना दिया गया। वहीं आगे चलकर मैरीएन की कहानी बहुत फेमस हुई। उस पर एक नाटक, तीन फ़िल्में और तीन डाक्यूमेंट्री बनाई गई। 

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