अल्मोड़ा: उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण विकास विभाग की ‘ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना’ (REAP) महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। जिससे अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट विकासखण्ड स्थित पैठानी गांव की हेमा देवी ने खुद को आत्मनिर्भर बनाया है।
बनी आत्मनिर्भर
पति के निधन के बाद हेमा देवी पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी। दिव्यांग पुत्र की देखभाल और संसाधनों की कमी के कारण उनके लिए आर्थिक तंगी से निपटना एक बड़ी चुनौती थी। पहले उनके पास केवल एक देशी गाय थी, जिससे होने वाली आय परिवार का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। वहीं रीप परियोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में हेमा देवी ने आधुनिक डेयरी प्रबंधन, पशुओं के टीकाकरण और पोषण का वैज्ञानिक तरीका सीखा। परियोजना की आर्थिक सहायता से उन्होंने उन्नत नस्ल की दुधारू गाय खरीदी। प्रशिक्षण और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने का परिणाम यह हुआ कि आज हेमा देवी प्रतिदिन लगभग 8 लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं। दूध और घी की बिक्री से उन्हें अब प्रतिमाह करीब ₹18,000 की आय हो रही है। इस आर्थिक स्वावलंबन ने उनके जीवन में नई उम्मीदें जगा दी हैं। वे अब अपने पुत्र की बेहतर देखभाल करने के साथ-साथ परिवार की सभी जरूरतें आत्मविश्वास के साथ पूरी कर रही हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
अपनी सफलता से उत्साहित हेमा देवी अब गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही न मिले, बल्कि उन्हें कौशल और बाजार से जोड़कर स्थायी आजीविका प्रदान की जाए।