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अल्मोड़ा: प्रसिद्ध गोल्ज्यू देवता का एक ऐसा मंदिर जहां अर्जी लगाने से मिलता है न्याय, 12वीं शताब्दी में हुआ था निर्माण

अल्मोड़ा: उत्तराखंड में वैसे तो कई धर्मस्थल हैं, लेकिन उनमें से एक है कुमाऊ क्षेत्र में अल्मोड़ा के पास स्थित गोल्ज्यू देवता मंदिर। मान्यता है कि मंदिर में लगी अर्जी के बाद गोल्ज्‍यू देवता अपने भक्त की समस्या का समाधान करते हैं। कुमाऊं के लोग गोल्ज्‍यू को अपना ईष्ट देवता मानते हैं।

न्याय के देवता गोल्ज्यू देवता

अल्मोड़ा जिला मुख्यालय से महत आठ किमी दूर अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाइवे पर चितई नामक स्थान पर गोल्ज्‍यू देवता का मंदिर है। यहां विराजमान देवता को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में लगे स्टांप पेपर पर लिखी हजारों अर्जियां इस बात की गवाह हैं कि मंदिर में लोग अपनी समस्या के समाधान और न्याय की गुहार लगाने आते हैं। भक्तों की मान्यता अनुसार जिसे कहीं से भी न्याय ना मिले, उसे गोल्ज्यू देवता न्याय देते हैं। यहीं कारण है कि मंदिर में हर रोज सैकड़ों अर्जियां लगती हैं। लोग स्टाप पेपर पर भी अपनी शिकायत और समस्या लिखकर देते हैं। मंदिर के पुजारी इस अर्जी को गोल्ज्‍यू देवता के चरणों में रखकर श्रद्धालु से इसे मंदिर परिसर में टंगवाते हैं।

जन श्रुतियों के अनुसार जुड़ी कहानी

पंडित संतोष पंत ने बताया कि एक कथा के अनुसार, गोल्ज्यू देवता को ग्वाल देवता के नाम से भी जाना जाता है। यह कथा राजा और रानी से जुड़ी है, जहां नवजात शिशु को उसकी सौतेली मां द्वारा नदी में फेंक दिया गया था, लेकिन बाद में उसे न्याय मिला और वह एक न्यायप्रिय राजा बना। जिससे उसे ग्वाल देवता या गोल्ज्यू देवता के रूप में जाना जाने लगा। बताया जाता है कि गोल्ज्यू देवता चम्पावत के अलावा अल्मोड़ा के चितई में भी अपना दरबार लगाते थे। जहां वह लोगों का न्याय करते थे। कहा जाता है कि तब से ही कुमाऊं में उन्हें न्याय का देवता माना जाने लगा।

12 वीं शताब्दी में हुआ था मंदिर का निर्माण

मान्यता के अनुसार चंद वंश के एक सेनापति ने 12 वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण करवाया था। न्याय के देव गोलू देवता को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। उनमें से सबसे प्रसिद्ध है कि यहां पर कत्यूरी वंश के शासकों का 7वीं से 12वीं सदी तक राज था। गोलू महराज कत्यूरी वंश के राजकुमार या सेनानायक थे।

मनोकामना पूरी होने पर लोग चढ़ाते है घंटियां

मंदिर में हजारों घंटे-घंटियों का संग्रह है। जिन लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है वे यहां घंटी चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में छोटी-बड़ी घंटियां टंगी हैं। इसके अलावा वर्षों से मंदिर परिसर के दो कमरों में भी हजारों की संख्या में वह घंटियां रखी हैं जो तेज हवाओं या फिर किन्हीं अन्य कारणों से गिर गई थीं।

देश-विदेश से मंदिर आते हैं लोग

पं. संतोष पंत, पुजारी गोल्ज्यू मंदिर, चितई ने बताया कि गोलज्‍यू देवता को न्याय के देवता के रूप में पूजते हैं। गोलज्‍यू के दर्शन करने और न्याय की गुहार लगाने के लिए देश-विदेश से लोग मंदिर आते हैं। जिन को कहीं से न्याय नहीं मिलता वह स्टांप पेपर या सादे कागज में यहां अर्जी टांगते हैं।

चितई गोलू देवता मंदिर का स्थान और कैसे पहुंचें

गोलू देवता चितई मंदिर अल्मोड़ा से महत आठ किमी दूर पिथौरागढ़ रोड पर स्थित है। यह सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है और टैक्सी, बस आदि साझा करके आसानी से पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेल संपर्क काठगोदाम रेलवे स्टेशन 94 किमी है। पंतनगर हवाई अड्डा से 124 किमी अल्मोड़ा पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा हैं।

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