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अल्मोड़ा: देवभूमि के धार्मिक स्थलों की मर्यादा बचाने की पहल: केंद्रीय विधि मंत्रालय ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को लिखा पत्र

​अल्मोड़ा: उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों की मर्यादा, पवित्रता और सुरक्षा की रक्षा के लिए प्रस्तावित ‘उत्तराखंड धार्मिक स्थल मर्यादा संरक्षण अधिनियम’ के दिशा में एक बड़ी और जरूरी प्रगति सामने आई है।

मिला था समर्थन

केंद्रीय विधि मंत्रालय ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर इस प्रस्तावित कानून के प्रारूप पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार के इस कदम से राज्य में धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए एक सख्त और प्रभावी कानून बनने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।‌ उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ के रूप में जाना जाता है और यहां के धार्मिक स्थलों की एक विशिष्ट पहचान और आध्यात्मिक गरिमा है। इन स्थलों की मर्यादा बनाए रखने और प्रतिकूल गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से अधिवक्ता विनोद चंद्र तिवारी, अधिवक्ता हिमांशु जोशी, अधिवक्ता प्रभाकर जोशी, अधिवक्ता भूपेश सिंह बिष्ट और नीमा सहित अन्य सहयोगियों ने मिलकर ‘उत्तराखंड धार्मिक स्थल मर्यादा संरक्षण अधिनियम’ का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार किया था। पूर्व में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान इस मसौदे को सार्वजनिक किया गया था, जिसे प्रदेश के धार्मिक और सामाजिक व्यापक समर्थन मिला था।
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प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य

अधिवक्ताओं द्वारा तैयार किए गए इस कानून के प्रारूप का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की प्राचीन धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक पहचान और जनभावनाओं को सुरक्षित रखना है। प्रारूप तैयार करने वाले अधिवक्ताओं का मानना है कि देवभूमि की पवित्रता बनाए रखने के लिए एक सुदृढ़ और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था समय की मुख्य मांग है। यदि राज्य सरकार इस मसौदे को स्वीकार कर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाती है, तो प्रदेश में एक प्रभावी कानूनी ढांचा अस्तित्व में आएगा।

​राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा

केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा मुख्य सचिव को पत्र लिखे जाने के बाद अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है। इस घटनाक्रम से प्रदेशवासियों और धार्मिक-सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े लोगों में उत्साह है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तराखंड सरकार इस विषय की गंभीरता को देखते हुए प्रस्तावित प्रारूप का कानूनी परीक्षण कराएगी और आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही एक ठोस कानून का रूप देगी।

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