अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। पहाड़ों में खून चूसने वाले जीव, जिन्हें जोंक भी कहा जाता है, उनसे अब लोगों की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी।
लोगों के लिए मददगार
जोंक जीव का वैज्ञानिक नाम (हिरुडो मेडिसिनालिस) है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके तहत अब जिले के आयुर्वेदिक अस्पताल चमड़खाल में पारंपरिक लीच थेरेपी की शुरुआत कर दी गई है। कई रोगों से निपटने के लिए यह लीच थेरेपी लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। लीच थेरेपी के माध्यम से शरीर से दूषित रक्त को बाहर निकाला जाता है, जिससे सूजन और दर्द में राहत मिलती है। इस संबंध में आयुर्वेदिक चिकित्सकों के मुताबिक बताया गया है यह प्राचीन पद्धति पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित मानी जाती है। ये चर्म रोग, रक्त परिसंचरण जैसे रोगों के इलाज में यह चिकित्सा पद्धति विशेष रूप से प्रभावी मानी जा रही है।
कहीं यह बात
इस संबंध में कुछ दिनों पहले डाॅ जितेंद्र कुमार पपनोई, चिकित्साधिकारी चमड़खान, रानीखेत ने बताया कि लीच थेरेपी एक प्राकृतिक, पारंपरिक और कारगर चिकित्सा पद्धति है। इससे मरीजों को विभिन्न रोगों से राहत मिल रही है और यह इलाज सुरक्षित भी है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार पहाड़ों में दो प्रकार की जोंक पाई जाती हैं। जो विषैली और विष रहित होती है। लीच थेरेपी में केवल विष रहित जोंक का उपयोग किया जाता है।