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अल्मोड़ा: लापरवाही से खड़े ट्रक से टकराई थी कार, अल्मोड़ा MACT ने घायल युवक को ब्याज सहित ₹3.59 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश

अल्मोड़ा: मोटरयान दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT)/जिला न्यायाधीश अल्मोड़ा के पीठासीन अधिकारी श्रीकान्त पाण्डेय की अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए सड़क पर लापरवाही से खड़े ट्रक को हादसे का मुख्य जिम्मेदार माना है। याची की ओर से विद्वान अधिवक्ता भगवती प्रसाद पंत व धनंजय साह ने पैरवी की।

अदालत ने सुनाया फैसला

न्यायालय ने दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए युवक हिमांशु मेर पुत्र खड़क सिंह, निवासी गड़ापानी, पो०ऑ० जलना, लमगड़ा अल्मोड़ा, जिला अल्मोड़ा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (ट्रक की बीमा कंपनी) को ₹3,59,565 (तीन लाख उन्सठ हजार पांच सौ पैंसठ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही याचिका दाखिल करने की तिथि (7 दिसंबर 2022) से भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।

​जानें पूरा मामला

​यह मामला 19/20 फरवरी 2020 की रात करीब 11:30 बजे का है। लमगड़ा (अल्मोड़ा) निवासी याची हिमांशु मेर अपने दोस्तों के साथ एक शादी समारोह से स्विफ्ट कार द्वारा वापस घर लौट रहे थे। कार को मनन साह चला रहे थे। जब वे करबला ब्राइट एंड कार्नर के पास पहुंचे, तो अचानक सड़क पर एक जंगली जानवर आ गया। जानवर को बचाने के चक्कर में चालक ने कार को बाईं ओर मोड़ा, जहां अंधेरे में एक ट्रक (संख्या UK05CA0635) बेहद लापरवाही और खतरनाक तरीके से खड़ा था। ट्रक पर लोहे के पाइप लदे हुए थे, जो ट्रक के पिछले हिस्से से काफी बाहर निकले हुए थे। इस ट्रक में न तो बैक लाइट जल रही थी, न कोई रिफ्लेक्टर लगा था और न ही बाहर निकले पाइपों पर कोई सुरक्षा या लाल कपड़ा बांधा गया था। अंधेरा होने के कारण कार सीधे ट्रक के पीछे निकले पाइपों से टकरा गई। यह टक्कर इतनी भयानक थी कि कार की अगली सीट पर बैठे रोहित कनवाल के सिर में पाइप घुस गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, पिछली सीट पर बैठे हिमांशु मेर के सिर में गंभीर चोटें आईं और दिमाग में खून के थक्के जम गए। हादसे में कार चालक मनन साह और अन्य सवारियों को भी चोटें आई थीं।


​कोर्ट ने ट्रक प्रबंधन को माना पूरी तरह जिम्मेदार

​सुनवाई के दौरान ट्रक की बीमा कंपनी (यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस) ने दावा किया था कि दुर्घटना कार चालक की लापरवाही के कारण हुई थी। हालांकि, अदालत ने सभी गवाहों और सबूतों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद इस तर्क को खारिज कर दिया। न्यायाधीश श्रीकान्त पाण्डेय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कार चालक पूरी सावधानी से वाहन चला रहा था और अचानक जंगली जानवर सामने आने पर उसने कार मोड़ी। असली लापरवाही ट्रक मालिक और चालक की थी, जिन्होंने घने अंधेरे में बिना किसी इंडिकेटर, रेडियम रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत के, लावारिस हालत में बीच रास्ते में ट्रक खड़ा कर रखा था, जिससे यह जानलेवा हादसा हुआ।
​मुआवजे का विवरण

​अदालत ने पीड़ित हिमांशु मेर को विभिन्न मदों के तहत कुल ₹3.59 लाख से अधिक का मुआवजा स्वीकृत किया। ₹1,84,565.06 (हादसे के बाद पीड़ित को हल्द्वानी के कृष्णा अस्पताल में करीब दो हफ्ते भर्ती रहना पड़ा था)। ₹1,00,000.00 (सिर जैसे संवेदनशील अंग में चोट और मानसिक दबाव के कारण)। ₹50,000.00 (इलाज के दौरान तीमारदारों के रहने-खाने का खर्च)। ₹25,000.00 (अल्मोड़ा से हल्द्वानी व दिल्ली इलाज के लिए आने-जाने का खर्च)।


​एक महीने के भीतर जमा करनी होगी राशि

​अदालत ने विपक्षी संख्या-5, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह मुआवजे की यह पूरी धनराशि एक महीने के भीतर न्यायाधिकरण (अधिकरण) में जमा करना सुनिश्चित करे। इसके बाद यह राशि उचित शिनाख्त के साथ सीधे पीड़ित हिमांशु मेर के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। अदालत ने याची को एक सप्ताह के भीतर अपने बैंक खाते का पूरा विवरण देने का भी निर्देश दिया है।

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