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अल्मोड़ा: उपभोक्ता आयोग का फैसला, एफआईआर और पोस्टमार्टम के बिना क्लेम खारिज करना गलत, बीमा कंपनी पर लगाया इतना जुर्माना

अल्मोड़ा: अल्मोड़ा में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्लेम के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिसमें एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को मृतक की पत्नी को ₹20 लाख की बीमा राशि देने का आदेश दिया है। इस मामले में परिवादिनी की ओर से अधिवक्ता भगवती प्रसाद पंत ने पैरवी की।

जानें मामला

इस संबंध में आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल एफआईआर और पोस्टमार्टम न होने के आधार पर दुर्घटना बीमा दावा खारिज करना न्यायोचित नहीं है। जानकारी के अनुसार गुड़ौली (चैलछीना, भनोली) की निवासी गीता देवी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पति शेखर चन्द्र ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से एसबीआई जनरल इंश्योरेंस की ₹20 लाख की दुर्घटना बीमा पॉलिसी ली थी‌। फरवरी 2024 में बाथरूम जाते समय सीढ़ियों से फिसलकर गिरने के कारण शेखर चन्द्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। बीमा कंपनी ने कानूनी औपचारिकताओं (FIR/PM) की कमी का हवाला देकर क्लेम देने से मना कर दिया था।

आयोग का आदेश

जिस पर आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल, सदस्य विद्या बिष्ट और सुरेश चंद्र कांडपाल ने मामले की सुनवाई की। आयोग ने कहा कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पटवारी व्यवस्था लागू है। अतः राजस्व उपनिरीक्षक की जांच रिपोर्ट को एफआईआर के समतुल्य माना जाना चाहिए। अस्पताल के रिकॉर्ड और राजस्व विभाग की रिपोर्ट से यह सिद्ध हुआ कि मृत्यु सीढ़ियों से गिरने के कारण सिर में आई गंभीर चोटों से हुई थी। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह 45 दिन के भीतर परिवादिनी को ₹20 लाख की बीमा राशि का भुगतान करे। जिसमें 50,000: मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में व ₹20,000: वाद व्यय (कानूनी खर्च) के रूप में।

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