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अल्मोड़ा: अदालत का फैसला, चेक बाउंस मामले में बरकरार रखी तीन महीने की कैद और 17.30 लाख रुपये जुर्माने की सजा

अल्मोड़ा: अल्मोड़ा के सत्र न्यायाधीश श्रीकान्त पाण्डेय की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में अभियुक्त निशांत कपूर की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत (सिविल जज जू०डि०/न्यायिक मजिस्ट्रेट, अल्मोड़ा) के 20 मई 2024 के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है, जिसके तहत आरोपी को तीन महीने के साधारण कारावास और 17,30,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

जानें क्या है मामला

अधिवक्ता भगवती प्रसाद पंत के मुताबिक परिवादी पान सिंह अधिकारी (निवासी चौखानपाटा, अल्मोड़ा) और आरोपी निशांत कपूर (निवासी नारायण तिवारी देवाल, अल्मोड़ा) के बीच आपसी जान-पहचान और मित्रवत संबंध थे। आरोपी ने अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं का हवाला देते हुए समय-समय पर परिवादी से कुल 16,61,748 रुपये उधार लिए थे। उधार की रकम चुकाने के लिए आरोपी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, शाखा अल्मोड़ा का 16,61,748 रुपये का एक चेक (संख्या 012315, दिनांक 30 सितंबर 2020) दिया था। जब इस चेक को बैंक में डाला गया, तो खाते में अपर्याप्त निधि (“fund insufficient”) होने के कारण यह 2 दिसंबर 2020 को बाउंस होकर वापस आ गया। इसके बाद, विधिक नियमों का पालन करते हुए परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से 19 दिसंबर 2020 को नोटिस भेजा, जो 22 दिसंबर 2020 को आरोपी को प्राप्त हो गया। नोटिस मिलने के बावजूद तय समय के भीतर भुगतान न होने पर परिवादी ने एनआई एक्ट (परकाम्य विलेख अधिनियम) की धारा 138 के तहत वाद दायर किया था।
अदालत का आदेश

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी ने 4 सितंबर 2020 को लिखित रूप में इस बात को स्वीकार किया था कि उसने पैसे उधार लिए हैं और इसी आधार पर उसने नया चेक जारी किया था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी एनआई एक्ट की धारा 118 और 139 के तहत मिलने वाली कानूनी उपधारणाओं को झुठलाने या यह साबित करने में असफल रहा कि उसने कोई कर्ज नहीं लिया था। चूंकि अपीलार्थी (आरोपी) और उसके अधिवक्ता लगातार सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे, इसलिए अदालत ने न्यायमित्र (Amicus Curiae) के रूप में अधिवक्ता गोधन सिंह बिस्ट की बहस सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए आदेश दिया है कि यदि आरोपी ने कोई पूर्व राशि जमा की है तो उसका समायोजन करते हुए बाकी प्रक्रिया पूरी की जाए। साथ ही, अदालत के फैसले के बाद आरोपी के जमानत मुचलके निरस्त कर दिए गए हैं और निचली अदालत को निर्देश दिया गया है कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाए।

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