अल्मोड़ा: ऑस्ट्रेलिया में शोध और वैज्ञानिक करियर छोड़कर उत्तराखंड लौटे डॉ. नीरज पंत आज राज्य के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
कृषि माॅडल तैयार
अल्मोड़ा के खूंट धामस गांव के निवासी डॉ. पंत ने हिमालयी जलस्रोतों और नदियों पर वर्षों के शोध के बाद अब अपने ज्ञान को धरातल पर उतार दिया है। साथ ही वह पलायन रोकने का एक टिकाऊ कृषि मॉडल भी तैयार कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में शोध से खेतों तक का सफर
हाइड्रो जियोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ. नीरज पंत ने 2020 में आईआईटी धनबाद से ग्लेशियर हाइड्रोलॉजी पर और वर्ष 2025 में वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया) से अपनी दूसरी पीएचडी पूरी की। ऑस्ट्रेलिया में शोध के दौरान मिली धनराशि से उन्होंने अल्मोड़ा के सूखते जलस्रोतों पर काम शुरू किया और ‘निहिर हिमालयन संस्थान’ की स्थापना की। इसी शोध ने उन्हें अपनी माटी में लौटकर काम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आईआईटी रुड़की से मिट्टी की जांच कराने के बाद वर्ष 2024 से करीब 400 बीघा बंजर व पथरीली जमीन पर शहतूत की खेती शुरू की। जिसमें बाड़ा लगाने और जमीन सुधार पर अब तक करीब 30 लाख रुपये खर्च कर दो लाख शहतूत के पौधे लगाए गए हैं। शहतूत के जरिए रेशम कीट पालन और हर्बल टी बनाने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।40 बीघा भूमि में हल्दी, अदरक और गहत की खेती की जा रही है। इस वर्ष करीब 500 किलो जैविक हल्दी और 1000 किलो अदरक का सफल उत्पादन हुआ है।
200 परिवारों को मिला रोजगार
डॉ. पंत की इस दूरदर्शी पहल से क्षेत्र के करीब 200 महिला-पुरुष काश्तकार जुड़े हैं, जो अब तक लगभग 20 लाख रुपये की आय अर्जित कर चुके हैं।