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अल्मोड़ा: उत्तराखंड के पहाड़ों में मुफ्त राशन से खेती-किसानी और रोजगार पर संकट, प्रताप सिंह नेगी ने सरकार से की रोजगारोन्मुखी नीतियों की मांग

​अल्मोड़ा: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि और ग्रामीण आर्थिकी को लेकर अल्मोड़ा निवासी प्रताप सिंह नेगी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।

जारी की विज्ञप्ति

साथ ही दावा किया है कि सरकारी मुफ्त राशन योजना के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में खेती-किसानी तेजी से घट रही है और लोग अपनी उपजाऊ जमीनों को बंजर छोड़ने लगे हैं। प्रताप सिंह नेगी का कहना है कि आज से 15-20 साल पहले उत्तराखंड के पहाड़ साग-सब्जी, फलों और पारंपरिक फसलों के उत्पादन से हरे-भर रहते थे। लेकिन जब से सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में मुफ्त राशन की मुहिम शुरू की है, तब से लोगों की दिनचर्या और कृषि के प्रति रुझान में भारी गिरावट आई है। उनका आरोप है कि मुफ्त राशन मिलने के कारण विशेषकर युवा वर्ग में कार्य के प्रति सुस्ती आई है।

​जंगली जानवरों और बंदरों का आतंक

​विज्ञप्ति में यह भी रेखांकित किया गया है कि पहाड़ों में वर्तमान में बढ़ रहे जंगली जानवरों और बंदरों के आतंक का सबसे बड़ा कारण खेतों का बंजर होना है। जब लोग खेती-बाड़ी करना पूरी तरह छोड़ देंगे, तो स्वाभाविक रूप से वन्यजीवों का रुख बंजर खेतों और रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ेगा। प्रताप सिंह नेगी ने सरकार के सामने यह सुझाव रखा है कि यदि मुफ्त राशन पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपये का उपयोग पहाड़ों में स्थानीय रोजगार सृजन और उद्योग-धंधे स्थापित करने में किया जाए, तो इससे तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

​की यह मांग

​उन्होंने सरकार से मांग की है कि मुफ्त राशन के स्थान पर पहाड़ों में रोजगार और आजीविका के साधन जुटाए जाएं। रोजगार के अवसर मिलने से पलायन की रफ्तार थमेगी। लोग दोबारा अपनी बंजर जमीनों पर खेती शुरू करेंगे, जिससे पहाड़ के खेत-खलिहान फिर से खिल उठेंगे और पुराने समय की तरह वन्यजीवों के आतंक से भी राहत मिलेगी।

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