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अल्मोड़ा: हनुमान-विभीषण संवाद से लंका दहन तक, हुक्का क्लब की ऐतिहासिक रामलीला में जीवंत हुए प्रभु श्रीराम के अद्भुत प्रसंग, उमड़ी दर्शकों की भीड़

अल्मोड़ा: ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला में आज भगवान श्रीराम की लीला के अंतर्गत हनुमान-विभीषण संवाद, हनुमान-सीता संवाद, अशोक वाटिका प्रसंग, अक्षय कुमार वध, लंका दहन, नल-नील प्रसंग तथा रामेश्वरम पूजन के दृश्यों का भावपूर्ण एवं प्रभावशाली मंचन किया गया।

रहें मुख्य अतिथि

जिसमें कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय, संवाद अदायगी और भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को रामकथा के विभिन्न प्रसंगों से जोड़ दिया। मंचन के दौरान प्रभु श्रीराम के प्रति हनुमान जी की अटूट भक्ति, माता सीता की दृढ़ता, विभीषण की धर्मनिष्ठा तथा अधर्म के विरुद्ध संघर्ष के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अल्मोड़ा के विधायक श्री मनोज तिवारी तथा विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री चंद्रशेखर आर. घोडके उपस्थित रहे। इनके साथ कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज, महानगर अध्यक्ष ताराचंद जोशी, निर्मल रावत एवं मनोज वर्मा सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी रामलीला में प्रतिभाग किया। अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। श्री लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की ओर से अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

कलाकारों का सजीव अभिनय

लीला के दौरान हनुमान जी और विभीषण के संवाद का सुंदर चित्रण किया गया। इस प्रसंग में विभीषण के चरित्र के माध्यम से यह संदेश उभरकर सामने आया कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। इसके पश्चात अशोक वाटिका में माता सीता और हनुमान जी के संवाद का भावपूर्ण मंचन हुआ। हनुमान जी द्वारा माता सीता को प्रभु श्रीराम का संदेश देना और उन्हें श्रीराम की ओर से विजय का विश्वास दिलाना दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
अशोक वाटिका में हनुमान जी द्वारा राक्षसों का सामना करने तथा रावण के पुत्र अक्षय कुमार के वध का प्रसंग भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद लंका दहन के दृश्य ने रामलीला में रोमांच और उत्साह का वातावरण बना दिया। हनुमान जी के पराक्रम और रावण की लंका में मचे हाहाकार के दृश्य को कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से जीवंत कर दिया। लंका दहन का प्रसंग अधर्म, अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक बनकर दर्शकों के सामने आया। रामलीला में आगे नल-नील प्रसंग का मंचन किया गया, जिसमें समुद्र पर सेतु निर्माण की कथा के माध्यम से प्रभु श्रीराम की सेना के सामूहिक प्रयास, विश्वास और समर्पण को दर्शाया गया। इसके पश्चात रामेश्वरम पूजन का प्रसंग श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में प्रस्तुत किया गया। इन दृश्यों ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि बड़े से बड़ा लक्ष्य भी विश्वास, एकता, परिश्रम और प्रभु के प्रति समर्पण से प्राप्त किया जा सकता है।

रहा योगदान

श्री लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला अल्मोड़ा की ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्लब के पदाधिकारी, सदस्य, कलाकार और सहयोगी कई महीनों के अभ्यास एवं सामूहिक परिश्रम से इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे रहते हैं। मंच पर दिखाई देने वाली प्रत्येक प्रस्तुति के पीछे कलाकारों के अभ्यास के साथ-साथ वेशभूषा, रूपसज्जा, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि, पार्श्व संगीत, मंच सज्जा और पर्दे के पीछे कार्य करने वाले सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

रहें मौजूद

इस आयोजन की सफलता में क्लब के अध्यक्ष धरणीधर पांडेय, संयोजक राजेंद्र तिवारी (पूर्व सभासद),त्रिभुवन गिरी, विनीत बिष्ट,हर्षवर्धन वर्मा, मीनाक्षी साह अग्रवाल एवं मीनाक्षी जोशी, ललित मोहन साह, मनोज साह, भरत गोस्वामी एवं कंचन बिष्ट,अभय उप्रेती, मणिकरण गुप्ता, मानस वाणी, पारस एवं रोहित साह, हरेंद्र वर्मा, दीवान बिष्ट,चंद्रशेखर कांडपाल एवं जगत मोहन जोशी, विनोद गिरी, चंदन आर्य, गौरव तिवारी, विजय चौहान, आकांक्षा, नीलम भट्ट, गीता तिवारी, अजय चौहान, मयंक कार्की एवं हर्षिता तिवारी, शगुन, प्रियंका बरखा,सहित सभी कलाकारों और सहयोगियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। श्री लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अल्मोड़ा की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही लोकनाट्य परंपरा का जीवंत उदाहरण है। क्लब का प्रयास है कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ इस ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखा जाए।

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