October 17, 2021

अल्मोड़ा: दहेज हत्या मामले में आरोपी पति को सात साल की कठोर कारावास की मिली सजा, व 5000 के अर्थदंड से किया गया दंडित।

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हमारे समाज में आज भी दहेज की प्रथा प्रचलित है। दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद बेटियां दहेज के लिए जलाई जा रही हैं, सताई जा रही हैं। आए दिन ऐसे ही दहेज लोभियों की खबरें सामने आती है। वही आज दहेज हत्या मामले में आरोपी पति को सात साल की कठोर सजा सुनाई गई है।

जाने क़्या है पूरा मामला-

19 जनवरी 2019 को मृतका का हुआ था विवाह-

मृतका का विवाह 19 जनवरी 2019 को आरोपी शेखर चंद्र के साथ संपन्न हुआ। विवाह में वादी मुकदमा द्वारा अपनी हैसियत के अनुसार उचित उपहार दहेज के रूप में दिये गये। उसके बावजूद भी दहेज लोभियों का लालच नही गया।

मृतका को ससुराल में किया जाता था प्रताड़ित-

ससुराल वाले मृतका को दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। जिसके बाद मृतका अपने चाचा के यहां चली गई। जिसके बाद चाचा ने मृतका के परिजनों को उनके यहां होने की बात कही। जहां उसने बताया कि उसके पति और देवर देवरानी ने उसे घर से निकाल दिया है,और ससुराल में उसके साथ नौकरानी जैसा बर्ताव किया जाता है। साथ ही ससुराल वाले उससे कुछ पैसों और वाहन की डिमांड पूरी होने पर ही दोबारा घर वापस आने की बात कही।

ससुराल पक्ष से प्रताड़ित होकर मृतका ने 29 मार्च 2019 को मायके में की थी आत्महत्या-

दहेज लोभियों ने दहेज के लिए एक और बेटी की बलि चढा दी। दहेज के लिए ससुराल वालों ने मृतका को खुब प्रताड़ित किया। जिससे तंग आकर मृतका ने 29 मार्च 2019 को अपने मायके में आत्महत्या कर ली थी।

मृतका के पिता ने उसके पति और अन्य के खिलाफ थाना दन्या में दर्ज कराई थी दर्ज-

मृतका के आत्महत्या जैसा कदम उठाने के बाद परिजनों ने मृतका के पति और अन्य के खिलाफ थाना दन्या में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया।

दहेज हत्या मामले में आरोपी पति को सात साल के कठोर कारावास की मिली सजा-

आरोपी पति को जेल भेजा गया। जिसके बाद विवेचना अधिकारी की ओर से विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। मामले का विचारण अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला। अभियोजन की ओर से 16 गवाह न्यायालय में पेश किये गये। पत्रावली में मौजूद साक्ष्य व गवाहों का परिसीलन कर न्यायालय ने आरोपी पति को सात साल का कठोर कारावास की सजा सुनाई, और इसी के साथ आरोपी को पांच हजार रुपये के अंर्थदंड से भी दंडित किया गया।

आखिर कब तक दहेज लोभियों के लालच की भेंट चढ़ेगी बेटियां-

देश में आखिरकार कब तक ऐसे दहेज लोभियों के लालच की भेंट चढ़ेंगीं बेटियां। कब सुधरेगी हमारी मानसिकता। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है दहेज को एक दंडनीय अपराध घोषित करने के बाद और कई अभियानों के माध्यम से इस प्रथा के असर के बारे में जागरूकता फैलाने के बाद भी लोग इसका पालन नहीं करते। सरकार ने दहेज को दंडनीय अपराध बनाया है पर इससे संबंधित कानून को सख्ती से लागू नहीं किया गया है। विवाह के दौरान दिए गए उपहारों और दहेज के आदान-प्रदान पर कोई रोक नहीं है। ये खामियां मुख्य कारणों में से एक हैं क्यों यह बुरी प्रथा अभी भी मौजूद है।