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अल्मोड़ा: डॉ. ललित चन्द्र जोशी का लेख, आकाशवाणी और कबूतरों के जोड़े

डॉ. ललित चन्द्र जोशी समय –  समय पर पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं । उनका यह  प्रकृति  से लगाव अदभुत है ।  जंगल, पक्षी, पौधें और जानवरों से जुड़ें विषयों को उन्होने हमेशा तवज्जो दी है । आज आकाशवाणी और कबूतरों के जोड़े को लेकर उनका एक लेख सामने आया है । जिसमें उन्होने आकाशवाणी के सौंदर्यकरण व पक्षियों के लिए गहन चिंतन किया है । उनके यह लेख ने हमें भी सोचने को विवश कर दिया कि यदि आवासीय परिसर के पास खाली पड़ी भूमि को  पार्क बनाकर, विविध फूलों की वाटिका बनाकर विकास किया जाए तो पक्षियों को अपना घर मिल जाएगा और जीर्ण पड़े  आवासीय परिसर की स्थिति भी सुधर जाएगी, आकाशवाणी का सौंदर्य निखर जाएगा सो अलग । लेकिन यह तभी संभव है जब जन जन की वाणी सरकार तक पहुंचे ।

जहां जहां तक लोक विद्यमान है वहां वहां तक आकाशवाणी की गूंज  -डॉ. ललित चन्द्र जोशी

संचार माध्यमों के रूप में ऑल इंडिया रेडियो को योगदान  अविस्मरणीय है। आकाशवाणी हमारे सुदूरवर्ती ग्राम क्षेत्रों तक संचार करता है। यह जन जन की वाणी है। आधुनिक दौर में भी इसकी विश्वसनीयता बनी हुई है।  जहां -जहां तक लोक विद्यमान है वहां -वहां तक आकाशवाणी की गूंज है।

मजदूर वर्ग से लेकर उच्च वर्ग तक आकाशवाणी लोकप्रिय माध्यम के रूप से उभरा है

डॉ. ललित चन्द्र जोशी का कहना है कि मजदूर वर्ग से लेकर उच्च वर्ग तक आकाशवाणी लोकप्रिय माध्यम के रूप से उभरा है। यदि अल्मोड़ा के आकाशवाणी की बात करें तो यहां  के कार्यक्रमों को सुनने वालों की संख्या बढ़ी है। यह सबसे पुराना केंद्र है। देश का ऐसा उपक्रम है जो देश से संचालित होता है। आकाशवाणी के कर्मनिष्ठ निदेशक श्री प्रतुल जोशी जी के आने के उपरांत  यहां के कार्यक्रमों में विविधता देखने को मिली।

आकाशवाणी का सौंदर्य और निखर आता

उन्होने कहा कि मैं जब भी इस स्थान से गुजरता हूँ तो देखता हूँ कि आकाशवाणी के  जो रेजीडेंसीएल क्वार्टर हैं वो जहां- तहां से जीर्ण हो गए हैं। जिनको रिपेयर किये जाने की जरूरत है। कबूतरों के दर्जनों जोड़ों का डेरा बना है।  इस आवासीय परिसर के पास खाली पड़ी भूमि को यदि पार्क बनाकर, विविध फूलों की वाटिका बनाकर विकसित किया जाता तो आकाशवाणी का सौंदर्य और निखर आता।  सरकारों और क्षेत्रीय नेतृत्व को इस दिशा में सोचने की आवश्यकता है।

– डॉ. ललित चन्द्र जोशी

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