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अल्मोड़ा: सर्वोदय इंटर कॉलेज जयंती एसोसिएशन (SICJAA) की बैठक, एसोसिएशन का गठन व स्कूल के जीर्णोद्धार व शैक्षणिक विकास के लिए हुए यह निर्णय

अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। ‌अल्मोड़ा के सर्वोदय इंटर कॉलेज जयंती पूर्व छात्र संघ (एस.आई.सी.जे.ए.ए.) की कार्यकारी समिति एवं सदस्यों की एस.आई.सी. स्टाफ के सदस्यों, छात्रों के अभिभावकों और अन्य हितधारकों के साथ एक बैठक 10.05.2024 और 11.05.2024 को सर्वोदय इंटर कॉलेज जयंती परिसर में आयोजित की गई।

बैठक की कार्यवाही इस प्रकार है

दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत गीतः 10.05.2024 को प्रारंभ में, एस.आई.सी. जयंती की ओर से एस.आई.सी.जे.ए.ए. की कार्यकारी समिति के सदस्यों और अन्य प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए शिवराज सिंह विष्ट, प्रवक्ता (अंग्रेजी) ने डॉ. आनंद सिंह बिष्ट, अध्यक्ष और एस.आई.सी.जे.ए.ए. की कार्यकारी समिति के अन्य सदस्यों को दीप प्रज्ज्वलित करने के लिए आमन्त्रित किया। एस.आई.सी. के छात्रों द्वारा प्रार्थना के बाद एक सुंदर स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। इस मोके पर स्कूल के प्रिंसिपल और स्टाफ सदस्यों के अलावा छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे। बैठक में खंड शिक्षा अधिकारी (विद्यालय प्रशासक) प्रेमा विष्ट भी शामिल हुई। महासचिव द्वारा एस.आई.सी.जे.ए.ए. के गठन पर प्रस्तुतिः प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए एस.आई.सी.जे.ए.ए. के अध्यक्ष ने संस्था के महासचिव नारायण सिंह बिष्ट को एस.आई.सी.जे.ए.ए. का परिचय देने के लिए आमन्त्रित किया।

एसोसिएशन का किया गठन

महासचिव ने उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से बताया जिसके परिणामस्वरूप SICJAA का सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत गठन हुआ, इसका सविधान, इसके उद्देश्य, उपनियम, प्रेरणाएँ, चुनौतियाँ और संकल्प के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि एस.आई.सी. के पूर्व छात्र स्कूल के भवनों की जर्जर स्थिति से बहुत दुखी थे. जो गरीब और मासूम छात्रों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं, इसलिए भवनों के नवीनीकरण और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए धन की व्यवस्था करने के लिए एसोसिएशन का गठन किया गया। उन्होंने बताया कि 15.12.2023 को SICJAA के पंजीकरण और आयकर अधिनियम की धारा 12A के तहत आयकर छूट प्राप्त करने के बाद, एसोसिएशन स्कूल के अधिकतम पूर्व छात्रों के साथ लगातार संपर्क में है, जिसके परिणामस्वरूप, लगभग 150 पूर्व छात्रों ने एसोसिएशन की सदस्यता ग्रहण कर ली है। एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में स्कूल के 1972 बैच से लेकर 2010 बैच के पूर्व छात्र शामिल हैं। महासचिव ने बताया कि लगातार प्रयासों से 10 लाख रुपये (लगभग) की राशि जुटाई जा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एसोसिएशन का प्राथमिक उद्देश्य शैक्षणिक स्तर में सुधार करना और मेधावी और गरीब छात्रों को आर्थिक योगदान देना है, पर न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं के अभाव में शेक्षणिक स्तर में सुधार की दिशा में सार्थक योगदान देना संभव नहीं हो सकता।

छात्रों से की परिचर्चा

छात्रों से परिचर्चा करते हुए महासचिव ने छात्रों से उनकी समस्याओं और एसोसिएशन से अपेक्षाओं के बारे में पूछताछ की। अधिकांश छात्रों ने इमारतों की टपकती छत, पीने के पानी, शौचालय आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को उठाया। 8वीं कक्षा के छात्र मास्टर कन्हैया ने छात्रों की समस्याओं में जैसे कि टपकती छतों के कारण असुरक्षा की भावना, बोर्डी / पुस्तकालय की कमी और मनोरंजन, खेलों आदि के साधनों की अनुपलब्धता को उजागर किया। छात्रों की समस्याओं को एसोसिएशन के सदस्यों ने धेर्यपूर्वक सुना और छात्रों की हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। महासचिव ने स्टाफ सदस्यों से भी राय मांगी। स्टाफ सदस्यों ने लबे समय तक स्कूल प्रबंधन का गठित न होना, नियमित प्रधानाचार्य का चयन न होना, जीर्ण-शीर्ण कक्षाओं आदि के कारण उनके सामने आने वाली समस्याओं के बारे में बताया। छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करते हुए महासचिव ने एन.ई.पी. 2020 के अनुसार रटने के बजाय एक्टिविटी आधारित शिक्षण और पठन पर जोर दिया। उन्होंने एक्टिविटी आधारित शिक्षा की बढ़ावा देने के लिए छात्रों के साथ कुछ लाइव एक्टिविटी की, जिनका छात्रों ने भरपूर आनंद लिया। उन्होंने विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए जापान के विश्व प्रसिद्ध इकीगाई सिद्धांत को पावर पॉइंट और विडियो के माध्यम से बखूबी ढंग से समझाया।

शैक्षणिक सुधार के लिए अध्यक्ष का संबोधन

जिसमें अध्यक्ष डॉ. आनंद सिंह विष्ट ने छात्रों और कर्मचारियों से बातचीत करते हुए विस्तार से बताया कि कैसे शिक्षण और पठन को अधिक रोचक और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षकों को अपने विषय के प्रति जुनून होना चाहिए और उसमें होने वाले परिवर्तन और आधुनिक तकनीकी से अपडेटड रहना चाहिए। छात्रों को व्यवहारिक रूप से बुनियादी बातों और तकनीकी शब्दों को समझाना चाहिए। उन्होंने कमजोर छात्रों के परिणाम को बेहतर बनाने के लिए अपने पेशेवर अनुभव के आधार पर कई उदाहरण साझा किए। उन्होंने छात्रों से कुछ बुनियादी सवालों के जवाब लिखकर लाने को कहा, जैसे “आप शिक्षित क्यों होना चाहते हैं?” आपका पसंदीदा विषय क्या है और क्यों?” जिसके आधार पर छात्रों की रुचि का पता लगाया जा सके और भविष्य में उनका मार्गदर्शन किया जा सके। डॉ. संजय गुरुरानी और डॉ. भीम सिंह नेगी ने भी कॉलेज से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं और अपनी उपलब्धियों से शिक्षकों और छात्रों को प्रेरित किया। डॉ. संजय गुरुरानी ने गतिविधि आधारित शिक्षण पर भी जोर दिया और यह भी आश्वासन दिया कि वह भविष्य में विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में गतिविधि आधारित प्रयोगों के संबंध में शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ इंटरेक्टिव सत्र की व्यवस्था करेंगे जो छात्रों और शिक्षकों के लिए बहुत उपयोगी होगा।

अभिभावकों एवं जन प्रतिनिधियों से संवाद

वहीं दिनांक 11.05.2024 की कार्यवाही निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रारम्भ हुई और बेठक में लगभग 70-80 अभिभावक, जन प्रतिनिधि एवं समाज के अन्य सवेदनशील व्यक्ति उपस्थित थे। महासचिव ने SICJAA और SICJAA के द्वारा किए जा रहे नेक काम के लिए प्रमुख योगदानकर्ताओं के नाम के बारे में एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने हमारे स्वतंत्रता सेनानियों विशेषकर श्री राम सिंह धौनी जी और श्री दुर्गा दत्त शास्त्री जी के असाधारण नेतृत्व और दृढ़ विश्वास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने किस प्रकार क्षेत्र की जनता को हमारे विद्यामन्दिर के निर्माण के लिए अपने संसाधनों से परे दान करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उपस्थित लोगों और सभी हितधारकों से कॉलेज के नवीनीकरण और गौरव की बहाली के लिए अपनी क्षमता के अनुसार उदारतापूर्वक योगदान देने का अनुरोध किया। महासचिव महोदय ने छात्रों के साथ कुछ प्रेरक गतिविधियाँ स्टेज में प्रस्तुत की, जिनका सभी ने आनंद लिया। इसके बाद उन्होंने अध्यक्ष डॉ. आनन्द सिंह विष्ट को कॉलेज के शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए अपने व्यापक अनुभव को साझा करने के लिए आमन्त्रित किया।

विस्तृत प्रस्तुति से दी जानकारी

समय शिक्षा और विकास पर अध्यक्ष द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशनः डॉ. आनंद सिंह विष्ट एस.आई.सी.जे.ए.ए. के अध्यक्ष ने एक विस्तृत प्रस्तुति द्वारा बहुत खूबसूरती से समझाया कि छात्रों का समग्र विकास कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है। उनका प्रेजेंटेशन पाठ्यक्रम के साथ-साथ खेल, कला, संगीत, नृत्य, व्यावसायिक शिक्षा आदि जैसी, सह- पाठ्यक्रम की गतिविधियों पर केंद्रित था। उन्होंने यह भी बताया कि पुस्तकालय, इन्फ़ारमल लेव, ऑडियो-विजुअल सामग्री, मॉडल आदि शिक्षण सहायक उपकरण कैसे शिक्षण को रोचक बनाने में उपयोगी हो सकते हैं। उन्होंने समझाया कि एक्टिविटी बेस्ड शिक्षण की मदद से कमजोर छात्रों की बुनियादी अवधारणाओं और बुनियादी सिद्धांतों को कैसे मजबूत किया जा सकता है। उनकी प्रस्तुति में ये भी बताया गया कि कैसे अनौपचारिक प्रयोगशालाएँ यानि बेकार और परित्यक्तित सामग्री से तैयार प्रयोगशालाएँ शिक्षण के साथ-साथ पर्यावरण के बारे में जागरुकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने छात्रों के बुनियादी सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए सदेह निवारण कक्षाएं, ब्रिज कोर्स, क्विज आदि पर भी जोर दिया। उन्होंने अप्रयुक्त और बेकार सामग्री की मदद से गणित और अंग्रेजी के लिए अनौपचारिक प्रयोगशालाएं बनाने की सलाह दी, जिसके लिए वे संबंधित शिक्षकों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

वार्षिक छात्रवृत्ति की घोषणा

छात्रवृत्ति की घोषणा कार्यवाही के बीच हमारे प्रथम और संस्थापक प्राचार्य और पूज्य गुरु देवीदत्त गुरुरानी के दूसरे सुपुत्र ई. अनिल कुमार गुरुरानी के आगमन से पूरा SICJAA परिवार और उपस्थित लोग बहुत प्रसन्न हुए, साथ ही उनके आगमन से सभी को बल मिला। कार्यवाही के दौरान  मोहन सिंह कुँवर, संगठन सचिव, एस.आई.सी.जे.ए.ए. ने 10,000/- रुपये की दो वार्षिक छात्रवृत्तियों की घोषणा की। जिसमें से एक उनके पिता स्वर्गीय डिकर सिंह कुँवरजी, एस.आई.सी. के संस्थापक शिक्षकों में से एक, के नाम पर 10वीं कक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले एक पुरुष छात्र के लिए और दूसरी उनकी सौ वर्षीय माता सावित्री देवी के नाम पर 10वीं कक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त करने वाली एक महिला छात्र के लिए होंगी। इसके बाद अनिल गुरुरानी ने स्कूल की अपनी यादें साझा कर छात्रों और शिक्षकों को प्रेरित किया। वह एस.आई.सी. के पहले छात्र थे जिन्होंने यू.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित भारतीय इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय रेलवे के शीर्ष पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने भी मेधावी छात्रों के लिए 10,000/- रुपये की दी वार्षिक छात्रवृत्ति की घोषणा की। कुटौली गांव के 1974 बैच के पूर्व छात्र, सी.पी.डब्ल्यू.डी. दिल्ली के कार्यकारी अभियंता (सेवानिवृत्त) शंकर राम ने अपने भाई प्रताप राम के साथ स्कूल की पुरानी यादें साझा की और इस नेक काम के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। शंकर राम द्वारा वर्ष 2006 में सर्वोदय इंटर कॉलेज की एक कंप्यूटर और प्रिन्टर दिया गया। आज तक भी विद्यालय के कर्मचारी इसी कम्प्यूटर से कार्य कर रहे हैं।

अभिभावकों और जन प्रतिनिधियों के साथ एक ओपन हाउस चर्चा

अभिभावकों और जन प्रतिनिधियों के साथ ओपन हाउस परिचर्चाः एस.आई.सी. के वर्तमान परिदृश्य और शिक्षण स्तर से अवगत होने और इसके गौरव की बहाली के सुझावों के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति में अभिभावकों और जन प्रतिनिधियों के साथ एक ओपन हाउस चर्चा शुरू की गई। सभी उपस्थित लोगों से व्यक्तिगत रूप से अपनी चिंताओं, विचारों और सुझावों को प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया। अधिकांश अभिभावकों ने विद्यालय में अनुशासनहीनता एवं गिरते शेक्षणिक स्तर पर चिंता जताई। कुछ अभिभावकों ने कहा कि स्कूल खुलने के आधे घंटे के भीतर छात्रों की बाजार में घूमते देखा जा सकता है, और कुछ शिक्षक भी अनुशासित नहीं हैं. अभिभावकों को उनके बच्चों की अनुपस्थिति के बारे में सूचित नहीं किया जाता और अभिभावकों के पूछने पर उचित उत्तर नहीं मिलता। कुछ शिक्षक नियमित रूप से कक्षाएं नहीं लेते हैं। फीस से एकत्रित विकास निधि का उपयोग नहीं किया जाता है और वर्षों से उसे खर्च नहीं किया जाता। पूर्व सैनिक हरि सिंह नेगी ने अन्य बातों के साथ-साथ अपने स्कूल के दिनों में दी जाने वाली अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा और स्कूल के विकास में छात्रों द्वारा किए गए श्रमदान पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा दुर्भाग्य से नैतिक मूल्य की शिक्षा अब पूरी तरह से गायब है।राजेंद्र जोशी, पूर्व प्रधान, सुनाड़ी ने अभिभावकों में जागरूकता की कमी पर प्रकाश डाला और सुझाव दिया कि पी.टी.ए. को समन्वय बनाकर काम करना चाहिए। श्री भुवन गहरवाल, ग्राम प्रधान काण्डे ने कहा कि शिक्षकों को विद्यालय में अनुशासन सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों की प्रगति पर नजर रखने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाना चाहिए। काण्डे के हयात सिंह कन्याल ने अभिभावकों की उदासीनता पर प्रकाश डाला और समय का पालन और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया। बसगांव के हरीश गहतोड़ी ने छात्रों में शराब की लत पर गंभीर चिंता जताई, जिस पर अंकुश लगाने की जरूरत है। सिलपड़ से महेश सिंह ने शिक्षकों की प्रतिबद्धता की कमी पर जोर दिया और कहा कि यदि शिक्षक प्रतिवद्ध होते तो वे पेड़ के नीचे भी बच्चों को पढ़ा सकते हैं।
सुन्दर सिंह रजवार का कहना था कि 12वीं में रसायन विज्ञान का प्रयोगात्मक कार्यकलाप वर्ष में केवल एक दिन ही हुआ. जिस पर भविष्य में ध्यान देने की आवश्यकता है। संग्रोली के श्याम नारायण पाडे ने अभिभावकों का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति अधिक गंभीर होना होगा और इस मिशन में अपना योगदान करना होगा। सभी स्थानीय लोगों को अपनी क्षमता अनुसार इस नेक कार्य में योगदान देना होगा। स्कूल प्रबंधन का गठन अविलंब करना होगा और ईमानदार और शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव रखने वाले एक अच्छे व्यक्ति को प्रबंधक के रूप में नियुक्त करना होगा।

शैक्षणिक विकास और लघु कार्यः

1 प्रिंसिपल और स्टाफ सदस्यों के आश्वासनानुसार स्टाफ और छात्रों के अनुशासन और समयनिष्ठा सुनिश्चित की जाएगी।

2 शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए, प्राचार्य के आश्वासनानुसार एक महीने के भीतर पी.टी.ए. का गठन किया जाएगा।

3 प्रिंसिपल के आश्वासनानुसार विकास निधि और अन्य अप्रयुक्त निधियों का उपयोग विकासात्मक गतिविधियों में किया जाएगा। यदि शिक्षा विभाग की मंजूरी की आवश्यकता होगी तो एस.आई.सी.जे.ए.ए. का कार्यकारणी पूर्ण सहायता प्रदान करेगी।

4 गतिविधि आधारित शिक्षण और सीखने की सुविधा के लिए, बेकार और अप्रयुक्त सामग्री के साथ अंग्रेजी और गणित की अनौपचारिक प्रयोगशालाएँ बनाई जाएंगी जिसके लिए SICJAA द्वारा धन उपलब्ध कराया जाएगा।

5 प्रयोगशालाओं का विकास SICJAA के अध्यक्ष डॉ. आनंद सिंह बिष्ट के मार्गदर्शन में किया जाएगा।

6 छात्रों के समय विकास के लिए और कक्षाओं से बंक करने और छुट्टी पर रहने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए, खेल, कला, संगीत, नृत्य नाटक आदि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। SICJAA ऐसी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराएगा।

7 आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग आवश्यक है क्योंकि एनईपी, 2020 के तहत कई सरकारी पहल वेब पोर्टल के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही हैं। इसलिए भविष्य में सभी शैक्षणिक और करियर मार्गदर्शन SICJAA की वेबसाइट https://www.sicjaa.com के माध्यम से दिया जाएगा। छात्रों, स्टाफ सदस्यों और हितधारकों को वेबसाइट और निम्न वेब लिंक नियमित रूप से देखने चाहिए।

(1)https://sicjaa.com/index.php/national-educational-policy

(2) https://sicjaa.com/index.php/career (3) https://sicjaa.com/index.php/contact-us

8 सांप, कीड़े आदि के प्रवेश को रोकने के लिए जीव विज्ञान प्रयोगशाला में ईंट की दीवार के साथ पिछवाड़े की टूटी खिड़कियों को बंद करने जैसे आकस्मिक छोटे कार्यों के लिए SICJAA द्वारा निधि उपलब्ध कराई जा सकती है।

जीर्णोद्धार के लिए धन जुटाना

📌📌नए सदस्यों के पंजीकरण के अभियान में तेजी लाई जाएगी और मौजूदा सदस्यों की इस नेक काम के लिए अपनी क्षमता के अनुसार उदारतापूर्वक दान करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
📌📌माता-पिता/अभिभावकों और अन्य हितधारकों को उनकी क्षमता के अनुसार स्कूल के नवीनीकरण के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बड़े पैमाने पर छोटा सा योगदान भी एक बड़ी राशि बन जाती है. जिसे हमने एम्स दिल्ली में भर्ती दाड़िमी गांव के 14 वर्षीय बच्चे के रक्त कैंसर के इलाज के लिए दान के आहान के मामले में देखा है, जिसमें 17 लाख से अधिक की राशि छोटे छोटे योगदान से एकत्र की गई थी।
📌📌एस.आई.सी.जे.ए.ए. के स्थानीय पूर्व छात्र जैसे श्री राजेंद्र जोशी और क्षेत्र के अन्य गण्यमान्य लोगों की मदद से जेंती व्यापार मंडल से धन जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
📌📌SICJAA कार्यकारणी की एक टीम इस नेक काम के लिए कल्याणी बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए जून, 2024 के प्रथम सप्ताह में डोल आश्रम का दौरा करेगी।

बैठक का समापन

बैठक का समापन, अध्यक्ष को धन्यवाद के साथ एस.आई.सी. स्टाफ के सदस्यों और छात्र स्वयं सेवकों को विशेष धन्यवाद के साथ समाप्त हुई। कुछ लोगों ने कहा कि यह मीटिंग पिछले 25 वर्षों के दौरान अपनी तरह की एक पहली बैठक थी जो पूरी तरह से छात्रों और उनके कल्याण पर केंद्रित रही। अंत में उपस्थित सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बैठक का समापन किया गया।

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