January 24, 2022

अल्मोड़ा: भौतिक विज्ञान विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया

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सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा ‘रिसेंट ट्रैंड्स इन दि डेवलपमेंट आॅफ फिजिकल साइंस मेडिकल डायग्नोस्टिक्स टू काॅमबैट कोविड-19 पेंडमिक‘ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार के संरक्षक रूप में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी, मुख्य अतिथि के रूप में मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 ओ0 पी0 एस0 नेगी, बीज वक्ता के रूप में एनएबीएल, दिल्ली के चेयरमैन प्रो0 आर0 के0 कोटनाला (एफ0एन0ए0एस0सी0, एफआईजीयू,), आमंत्रित वक्ता के तौर पर एनआईपीएस के वैज्ञानिक डाॅ0 दीपक सिंह बिष्ट और वेबिनार के संयोजक प्रो0 प्रवीण सिंह बिष्ट (विभागाध्यक्ष, भौतिक विज्ञान), आयोजक सचिव डाॅ0 प्रतिभा फुलोरिया रही और आयोजक सह-सचिव डाॅ0 तिलक जोशी, डाॅ0 विजय बल्लभ ने संयुक्त रूप से उद्घाटन करते हुए वेबिनार को संबोधित किया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये

वेबिनार के संरक्षक के तौर पर सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी ने वेबिनार के मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए वेबिनार के आयोजकों को अपनी शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि जीवन कितनी भी कठिन चुनौतियां से गुजर रहा हो तो ऐसे में चुनौतियों से हारने से बेहतर है कि चुनौतियों का सामना करने का प्रयास करना। हम चुनौतियों से लड़कर ही अपने जीवन में संतुलन बना सकते हैं। महामारी के संबंध में उन्होंने कहा कि यह महामारी भी हमारे सामने चुनौती लेकर आई है। इसको हमें सामुहिक प्रयासों से हराना होगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी हम सभी, यहां तक सम्पूर्ण विश्व के लिए चुनौती बनकर खड़ी हुई है। इसने सम्पूर्ण विश्व की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक सभी संरचनाओं को ध्वस्त किया है,  प्रभावित किया है। ऐसे में हमने इन चुनौतियों का सामना कर अपने जीवन को परिस्थितियों के अनुकूल बनाना है और हमने कहीं हद तक अपने को अनुकूल बना भी लिया है। शिक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि हमने हमने विश्वविद्यालय में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आॅनलाइन शिक्षा, ई0लर्निंग का सहारा लिया है। हमने इन विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षण कार्य को बेहतर बनाया है। अभी भी हमारे शिक्षक अध्यापन कार्य में लगे हुए है। आगे भी हमें नवीन तकनीकों को सीखकर अपने शिक्षण कार्य को बेहतर बनाने का प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय ने कम समय में इन चुनौतियों का सामना कर बेहतर मुकाम हासिल किया है। हम गुणवत्तापरक शिक्षा पर बल दे रहे है।  उन्होंने कहा कि महामारी के दौर में विश्वविद्यालय ने समाज को जागरुक करने के लिए मुहिम, जनजागरुकता अभियान, गोष्ठियों का आयोजन आदि कर बेहतर कार्य किया है। हमें युवाओं के माध्यम से समाज में चेतना विकसित करनी होगी, विज्ञान के द्वारा जनता को जागरुक करने का प्रयास करना होगा, शोध के माध्यम से युवा लोगों को प्रेरित कर समाज के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान में कई तकनीक/अप्लीकेशन आ गई है। जिनका सहारा हम अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर सकते हैं। हम परम्परागत ज्ञान को वैज्ञानिकता की कसौटी पर कसकर प्रयोग में ला सकते हैं। हमें अपनी प्रकृति को संरक्षण प्रदान करना होगा। हमें संतुलित विकास पर बल देकर इन महामारियों से छुटकारा पाने के लिए चिंतन करना होगा। हमें परम्परागत ज्ञान को संहेजने के लिए भौतिक विज्ञान का सहारा भी लेना होगा।  उन्होंने वेबिनार के संयोजक प्रो0 प्रवीण बिष्ट और आयोजकों एवं सदस्यों को बधाईयां दी।

एन0ए0बी0एल0 दिल्ली के चेयरमैंन प्रो0 आर0 के0कोटनाला ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये

इस अवसर पर बीज वक्ता के तौर पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक सेल-ग्रीन एनर्जी सोर्स के खोजक और एन0ए0बी0एल0 दिल्ली के चेयरमैंन प्रो0 आर0 के0कोटनाला ने ‘इनवायरोनमे।टल पाॅल्युशन वर्सेज कोरोना वायरस स्पे्रड एंड रोल आॅफ इट्स टेस्टिंग‘ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि भौतिक विज्ञानी इस महामारी के फैलने और इसके स्वरूप को जानने के लिए निरंतर शोध कार्य में लगे हुए हैं। प्रदूषित पर्यावरण इस महामारी को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौर में मैंने दिल्ली में पाॅल्युशन और वहां महामारी के स्वरूप एवं फैलाव पर शोधकार्य किया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के लिए आईटीपीसीआर टेस्टिंग के अलावा भी वैज्ञानिकों द्वारा कई तकनीक ईजाद की गई हैं। अब टाटा द्वारा क्रिस्पर सीएएस 9 तकनीक विकसित की गई है। जिसको टाटा एमडी चैक के नाम से जाना गया है। यह कम समय में अधिक टेस्ट कर कोरोना के लक्षणों को पकड़ती है। उन्होंने कह कि  भौतिक विज्ञानी नवीन तकनीकों के माध्यम से कोरोना की टैस्टिंग और इसके प्रसार आदि पर खोज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महामारी के बीच नई तकनीकों के माध्यम से महामारी पर अध्ययन किया जा रहा है। हमें सामाजिक दूर,ी हाथों को धोना और मास्क को पहन कर इस महामारी को फैलने से रोकना होगा।  

डाॅ0 दीपक सिंह बिष्ट ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये

इस अवसर पर आमंत्रित वक्ता के तौर पर दिल्ली के प्लांट बायोटेक्नोलाॅजिस्ट डाॅ0 दीपक सिंह बिष्ट ने ‘दि कोविड ऐराः आॅप्टीमिस्ट ओवर डिसपेयर‘ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने व्याख्यान में कोविड-19 वायरस के फैलाव, उसकी उत्पत्ति और उसके विभिन्न स्वरूप पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह महामारी अलग-अलग स्वरूपों में हमारे सामने नवीन चुनौतियां लेकर आ रही है लेकिन हमें घबराने की जरुरत नहीं है। हमारे वैज्ञानिक भी कोरोना के बदलते हुए स्वरूप पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और अध्ययन कर रहे हैं। हमें वैज्ञानिकों, चिकित्सकों के सुझावों को मानकर सजग रहने की आवश्यकता है।

मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति प्रो0 ओ0 पी0 एस0 नेगी ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये

वेबिनार के मुख्य अतिथि के तौर पर मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति प्रो0 ओ0 पी0 एस0 नेगी ने कहा कि कोविड-19 महामारी से बचाव करने में भौतिक विज्ञानी निरंतर शोध कर रहे हैं। वह इसकी स्थिति, इसके भौतिक विज्ञानी पक्ष अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी हाई एनर्जी फिजिक्स के अध्येता और वैज्ञानिक मिलकर अध्ययन कार्य में लगे हुए हैं। हमें इस महामारी से बचने के लिए भौतिक विज्ञानियों की बातों का भी संज्ञान लेना होगा। उन्होंने कोविड-19 महामारी से निजात पाने में भौतिक विज्ञान की खोजों और नवीन तकनीकों पर अपनी बात रखी। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें इस चुनौती से निपटने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। हमें कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। हमें पंचतत्वों और प्रकृति का संरक्षण कर कोरोना महामारी से लड़ने और इससे बचने का प्रयास करना होगा।

वेबिनार के संयोजक प्रो0 प्रवीण सिंह बिष्ट ने वेबिनार की रुपरेखा प्रस्तुत की

वेबिनार के संयोजक प्रो0 प्रवीण सिंह बिष्ट ने वेबिनार के संबंध में विस्तार से रूपरेखा रखी। उन्होंने कहा कि लोगों ने इस दौर में बुखार, कफ और स्वांस लेने में कठिनाई, छाती में दर्द, शरीर का तापमान में वृद्धि, रक्ताचार में उतार-चढ़ाव आदि का सामना किया है। हमारे भौतिक विज्ञानियों ने इस महामारी के दौर में नवीन तकनीक बनाकर इस महामारी से निपटने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। आज एक्स-रे के माध्यम से कोरोना के  लक्षणों का पता लगाया जा सकता है। विश्वभर के भौतिकशास्त्री इस पर अध्ययन कर भी रहे हैं। उन्होंने कहा हमें डब्ल्यू एच0ओ0 के दिशा-निर्देशों को मानना होगा, हमें अपने को अलग कर आइशोलेशन में रहना होगा। उन्होंने भौतिक विज्ञानियों और इंजीनियरों द्वारा कोविड-19 महामारी से लड़ने के प्रयासों को उदाहरण सहित प्रस्तुत किया। उन्होंने बेबिनार में आमंत्रित अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार भी जताया।
वेबिनार में आयेाजक सचिव डाॅ0 प्रतिभा फुलोरिया, आयोजन सह-सचिव डाॅ0 तिलक जोशी, डाॅ0 विजय बल्लभ ने भी बात रखी।वेबिनार का संचालन विभाग के डाॅ0 विजय बल्लभ ने किया। इस वेबिनार के आयोजक सचिव डाॅ0 प्रतिभा फुलोरिया रही और आयोजक सह-सचिव डाॅ0 तिलक जोशी ने सहयोग किया।

यह लोग रहे मौजूद

इस वेबिनार में डाॅ0 नंदन बिष्ट, डाॅ0 पवन जोशी, राजेश राठौर, प्रमेश टम्टा, गौरव कर्नाटक, डाॅ0 बी0आर0 चैहान,, डाॅ0 विशाल शर्मा, डॉ. ललित जोशी आदि के साथ देशभर के भौतिकशास्त्री, शिक्षक एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।