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अल्मोड़ा: सांस्कृतिक दलों के लोक कलाकारों ने जनगीत ,झोड़ा नृत्य व अन्य गीतों के माध्यम से किया धरना प्रदर्शन

अल्मोड़ा से जुड़ी खबर है। आज उक्त समस्याओं के निराकरण हेतु प्रदेश के समस्त पंजीकृत सांस्कृतिक दलों के लोक कलाकारों के द्वारा जनगीत ,झोड़ा नृत्य एवं अन्य गीतों के माध्यम से धरना-प्रदर्शन किया गया। जिसमें उन्होंने अपनी समस्या बताई। जिसमें सांस्कृतिक दलों की उपरोक्त समस्याओं का यथाशीघ्र निराकरण करने की बात कहीं। जिससे सांस्कृतिक दलों से जुड़े गरीब लोक कलाकार अपनी घर गृहस्थी सुचारू रूप से संचालित कर सके।

लोक कलाकार महसंगठन को दिया समर्थन

जिसमें लोक कलाकार महासंगठन को व्यापार मंडल अध्यक्ष सुशील साह , उपाध्यक्ष प्रतेश कुमार पांडे, महासचिव मयंक बिष्ट, उपसचिव अमन नजॉन की उपस्थिति में अपना समर्थन दिया। साथ ही गोल्डन बाॅइज के संयोजक सूरज वाणी ने भी अपने गोल्डन बाॅइज की ओर से कलाकारों को अपना समर्थन दिया। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी एवं उपाध्यक्ष आनंदी वर्मा एवं चंपा सुयाल ने भी अपनी पार्टी की ओर से कलाकारों को समर्थन दिया। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की छात्र नेता दीक्षा सुयाल ने भी कलाकारों को अपना समर्थन दिया।

यह लोग रहें उपस्थित

आज के धरना प्रदर्शन में वरिष्ठ रंगकर्मी दीवान कनवाल , गोकुल बिष्ट, चंदन बोरा, सुरेश लाल ,रमेश लाल, नारायण थापा जी के साथ-साथ रंगकर्मी प्रियंका चम्याल, मनीषा आर्या,अंबिका आर्या, महिमा आर्या, प्रकाश लाल , पंकज कुमार, जगदीश तिवारी, मानसी बोरा, पूजा बिष्ट, प्रियंका बिष्ट, पंकज बोरा, लकी पवार आदि रंगकर्मी मौजूद थे धरना प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष लोक कलाकार महासंघ देवेंद्र भट्ट , उपाध्यक्ष संदीप नयाल, विनोद कुमार ,महिला उपाध्यक्ष शीला पंत, महासचिव दयानंद कठेत, उप सचिव इंदर गोस्वामी, मनोज चम्याल प्रदेश अध्यक्ष लोक कलाकार महासंघ गोपाल चम्याल एवं प्रदेश महिला उपाध्यक्ष ममता वाणी भट्ट धरना प्रदर्शन में उपस्थित रहे।

जिसके आधार पर प्रदेश में पंजीकृत सांस्कृतिक लोक दलों की मुख्य समस्याऐं निम्नवत् हैं

  1. संस्कृति विभाग से पंजीकृत सांस्कृतिक लोक दलों के लम्बित बिलों का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
  2. संस्कृति विभाग से सांस्कृतिक लोक दलों के कलाकारों / दलनायको का मानदेय बाल नहीं बढ़ाया जा रहा है। 1
  3. कोरोना काल से आर्थिक तंगी से परेशान सांस्कृतिक लोक दलों का सूचना निदेशालय से आडिशन करवाया जाय यदि ऐसा सम्भव नहीं है तो सांस्कृतिक1 दलों को पूर्व ग्रेड में सम्बद्ध किया जाय।
  4. सांस्कृतिक लोक दलों को जी.एस.टी. के दायरे से बाहर रखा जाय ।
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