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अल्मोड़ा: बेटी की गला दबाकर हत्या का प्रयास करने के मामले में मां को मिली जमानत

अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद नाथ त्रिपाठी की अदालत ने बेटी का गला दबाकर उसे मारने की कोशिश करने के मामले में अभियुक्ता पारूल पत्नी शिवम दीक्षित, निवासी बेस तिराहा अल्मोड़ा को जमानत दे दी है।

जानें पूरा मामला-

07.07.2022 को स्नेहलता द्वारा एक तहरीर कोतवाली अल्मोड़ा में इस आशय की दी कि दिनांक 06.07.2022 से उसकी बहु पारूल ने अपनी तीन माह की बच्ची श्रद्धा को सॉय 05:00 बजे से दूध नहीं पिलाया और बहुत मारा उसके बार-बार बोलने पर भी बच्ची को दूध नहीं पिलाया और न ही उसे दूध पिलाने दिया और उसका फोन भी छिपा दिया तथा धमकी देने लगी कि ढाई लाख रूपये दो वरना बच्ची को मार दूंगी और बच्ची का गला बार-बार दबा रही थी। वह बहुत रोई, लेकिन अभियुक्ता नही मानी और बच्चे को मारती रही। इसी दौरान उसकी बहु ने उसे धक्का दिया, जिससे उसके हाथ में चोट भी लग गयी। उसकी बहु पारूल बच्ची को बेरहमी से मारपीट रही थी। वादी ने चुपके से अपनो फोन ढूंढा और 112 में कॉल किया और पुलिस उसकी बहु को समझा कर चली गयी। पुलिस के जाने के बाद भी वह बच्ची को मारती रही। वादी द्वारा दुबारा उ0नि० नेहा राणा के मोबाइल पर समय करीब 02:45 बजे रात्रि फोन किया, जिस पर वह अन्य पुलिसगण के साथ मौके पर आई, उनके सामने भी दादी की बहु, बच्ची को जोर-जोर से मारने लगी तथा उसका गला घोटने लगी। अभियुक्ता की ओर से पैनल अधिवक्ता श्री मो. इमरोज उपस्तीथ रहे। जिस पर अभियुक्ता की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र में कथन किया गया है कि अभियुक्ता दिनांक 08.07.2022 से न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार, अल्मोड़ा में निरूद्ध है। अभियुक्ता पर जो आरोप लगाये गये है, उस पर कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है। अभियुक्ता की सास द्वारा झूठी मनगणत घटना बनाकर उसे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियुक्ता पर उसकी सास के द्वारा व्यक्तिगत रंजिश के चलते घटना को अंजाम दिया गया है। कथित घटना रात 2 बजकर 45 मिनट की है। अभियुक्ता की सास पढ़ी लिखी महिला है वह बेस अस्पताल में ही काम करती हैं, उसके द्वारा अपनी बहु अभियुक्ता से पीछा छुड़ाने के लिए कथित घटना को अंजाम दिया गया है। मामले में विवेचक द्वारा आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है, जिससे इस बात का भय भी खत्म हो जाता है कि अभियुक्ता साक्ष्य व तथ्यों के साथ खुर्द बुर्द नहीं करेगी। मामले से सम्बन्धित मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी किसी भी चोट का प्रमाण नहीं है, जिससे अभियुक्ता पर लगाये गये।

कोर्ट का आदेश-

मामले में आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका है अतः समस्त तथ्यों एवं परिस्थतियों को देखते हुए मामले के गुण-दोष पर राय व्यक्त किये बिना न्यायालय के मत में अभियुक्ता जमानत पर रिहा किये जाने योग्य है। अभियुक्ता पारूल की ओर से प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया गया है। अभियुक्ता को संबंधित मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर रू० 30,000/- (रूपये तीस हजार) का स्व बंधपत्र व समान राशि के दो विश्वसनीय प्रतिभू प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किए जाने के आदेश दिए गए हैं।

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