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अल्मोड़ा: अब इंग्लैंड के वर्मिघम में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप पर फोकस – लक्ष्य सेन

थॉमस कप विजेता बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने भविष्य की रणनीति और सफलता के राज खोले। उन्होंने कहा कि यदि वह शटलर नहीं होते तो वह बास्केटवॉल या फुटबॉल खेल रहे होते।

अपने लक्ष्य को केंद्रित करते हुए सफलता की बुलंदियों को हासिल किया जा सकता है

थॉमस कप जीतने के बाद चैंपियन खिलाड़ी लक्ष्य सेन रविवार शाम गृह नगर अल्मोड़ा पहुंचे। उन्होंने परिवार संग चितई गोल्ज्यू मंदिर के दर्शन भी किये।  लक्ष्य सेन ने बताया कि उन्हें प्ले स्टेशन में गेम्स खेलना, मूवी देखना, ड्राइव पर बाहर जाना और खाना पसंद है। युवाओं को संदेश देते हुए चैंपियन खिलाड़ी ने कहा कि ध्यान लगाकर अपने लक्ष्य को केंद्रित करते हुए सफलता की बुलंदियों को हासिल किया जा सकता है, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो। कहा कि गेम को इंजॉय कर ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से खेलना उनकी सफलता का मूल मंत्र है, जो भी काम करें उसे गंभीरता से करें, ये ही चीजे लोगों को आगे ले जाती हैं। लक्ष्य ने कहा कि वह इंग्लैंड के वर्मिघम में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप पर फोकस कर रहे हैं।

पहाड़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं

लक्ष्य सेन ने कहा कि पहाड़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। बस उन्हें बेहतर मंच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा में इंडोर स्टेडियम और वहां सुविधाओं के विस्तार से यहां की प्रतिभाओं को बड़ी सहूलियत मिल सकती है। यहां से खेलकर प्रतिभाएं बड़े-बड़े मंचों पर अपना जौहर दिखा सकती हैं। उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम के विस्तार पर जोर दिया।

चितई गोल्ज्यू पर बड़ी आस्था

लक्ष्य सेन की मां निर्मला सेन ने बताया कि चितई गोल्ज्यू धाम पर उनके परिवार की बेहद आस्था है। उनके बच्चे जब भी बाहर से आते हैं तो वह परिवार समेत चितई गोल्ज्यू दर्शन को जरूर जाते हैं। रविवार शाम अल्मोड़ा पहुंचने के बाद सोमवार सुबह लक्ष्य ने माता निर्मला, पिता डीके सेन और भाई चिराग सेन के साथ सबसे पहले गोलू देवता के दर्शन कर दिन की शुरुआत की। लक्ष्य ने परिवार समेत पूर्ण विधि विधान से गोल्ज्यू की पूजा-अर्चना की।

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