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अल्मोड़ा: पहाड़ की कैद से आजाद हुए ‘राजू-मोती’: ‘पशु सुरक्षा सेवा समिति’ ने किया रेस्क्यू, प्रशासन की सख्ती, संचालक पर केस दर्ज

अल्मोड़ा: कुमाऊं महोत्सव में नियमों की अनदेखी कर ऊंट का व्यावसायिक उपयोग करने वाले एक संचालक के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है।

जानें क्या है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार अल्मोड़ा में आयोजित कुमाऊं महोत्सव के दौरान पशु सुरक्षा सेवा समिति की सचिव कामिनी कश्यप ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि वहां मौजूद एक ऊंट का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि इसके लिए कोई भी आवश्यक पंजीकरण नहीं कराया गया है। दरअसल रामनगर के ढिकुली निवासी शाहिद अंसारी बीते 22 जून को दो ऊंटों, राजू और मोती (दोनों की उम्र 9 वर्ष), को लेकर अल्मोड़ा के जीआईसी मैदान में चल रहे कुमाऊं महोत्सव में पहुंचा था। यहाँ वह ऊंटों की सवारी कराकर पैसे कमा रहा था। पशु सुरक्षा सेवा समिति को जब इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर संचालक को अवगत कराया कि पहाड़ी क्षेत्रों में ऊंटों का व्यवसायिक प्रयोग प्रतिबंधित है। साथ ही, उसके पास महोत्सव में ऊंट चलाने का कोई पंजीकरण भी नहीं था। समिति के हस्तक्षेप के बाद, संचालक ने 23 जून को ही ऊंटों को वापस ले जाने का वादा किया था। हालांकि, वह 27 जून तक महोत्सव में ऊंटों का व्यावसायिक इस्तेमाल करता रहा। नियमों की अवहेलना और पशु क्रूरता अधिनियम का उल्लंघन देखते हुए, पशु सुरक्षा सेवा समिति ने उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। रविवार दोपहर तीन बजे पुलिस की मौजूदगी में दोनों ऊंटों को सुरक्षित जयपुर रवाना कर दिया गया।

मुकदमा दर्ज

पशु सुरक्षा सेवा समिति (खोल्टा) की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने संचालक साहिद अंसारी के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। कोतवाली के प्रभारी योगेश चंद्र उपाध्याय ने पुष्टि की कि ऊंट संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

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