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अल्मोड़ा दुखद: दुनिया को अलविदा कह गए सुप्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल, उत्तराखंड की पहचान, परंपराओं, भावनाओं और जीवन दर्शन का जीवंत दस्तावेज थे उनके संगीत

अल्मोड़ा से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल का निधन हो गया है।

जताया दुख

उनकी मधुर आवाज़ और पहाड़ की खुशबू से भरे गीत हमेशा लोगों के दिलों में गूंजते रहेंगे। उन्होंने अपने संगीत से उत्तराखंड की संस्कृति और लोकगीतों को हर दिल तक पहुँचाया। उनका‌ इस तरह अचानक चले जाना संगीत जगत और पहाड़ के लिए बहुत बड़ी क्षति है।
दीवान कनवाल उत्तराखंड की लोक संस्कृति के एक सच्चे सपूत थे। उनकी आवाज़ में कुमाऊँ की वादियों की ठंडक, पहाड़ों की पुकार, प्रेम की मिठास और विरह की पीड़ा सब कुछ समाया हुआ था। गीत जैसे “आज कु छे मेत जा”, “हिट मेरी रंगीली”, “त्यार पहाड़ म्यार पहाड़” और कई अन्य आज भी लोगों के दिलों में गूंजते हैं, और यकीन मानिए, ये हमेशा गूंजते रहेंगे। उनके गीत सिर्फ़ संगीत नहीं थे – वे उत्तराखंड की पहचान, परंपराओं, भावनाओं और जीवन दर्शन का जीवंत दस्तावेज़ थे। उनके निधन पर विभिन्न जगत के लोगों ने दुख जताया है।

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