एस एस जे विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के स्नातकोत्तर कक्षाओं के छात्र – छात्राओं का 3 मई से 5 मई तक शैक्षिक भ्रमण पिथौरागढ़ जिले में स्थित पंचाचूली बेस कैंप किया गया। इस भ्रमण नें भूगोल विभाग के प्राध्यापक और एम. ए. भूगोल के विद्यार्थियों ने जौलजीबी होते हुए धारचूला पहुंचे। जौलजीबी में सभी ने महाकाली और गोरी गंगा नदियों का संगम देखा। साथ ही साथ झूला पुल से नेपाल गये। पंचाचूली बेस कैंप पहुंचे।
नदी और हिमनदों द्वारा बनाई स्थलाकृतियों को समझाते हुए मानव जीवन पर इनके प्रभावों के बारे में बताया गया
भू आकृति विज्ञान विशेषज्ञ तथा विभागाध्यक्ष डॉ ज्योति जोशी ने नदी और हिमनदों द्वारा बनाई स्थलाकृतियों को समझाते हुए मानव जीवन पर इनके प्रभावों के बारे में बताया गया। प्रो जोशी ने बताया कि सभी विद्यार्थियों ने रास्ते में पड़ने वाले दुगतु, दांतू, सेला, फिलम, बोन आदि गांवों को देखा। इन गाँवों में युवा होम स्टे और टूर गाईड को रोज़गार के रूप अपना रहे हैं। विद्यार्थी भोजपत्र के जंगल को देखते हुए बुरांश के सुंदर फूलों के मध्य होते हुए सभी बेस कैंप तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि धौली नदी जो कि काली की प्रमुख सहायक है, को धरम गंगा भी कहते हैं। इस सम्पूर्ण घाटी को दारमा के नाम से जाना जाता है। तवाघाट में धौली व काली के संगम को देखने के उपरांतनदी द्वारा निर्मित भू- आकृतियों को भी समझा गया। नेपाल और भारत की सदियों पुरानी साझा संस्कृति है जिसे जानने – समझने का प्रयास किया गया। जौलजीबी के मेले के विषय में भी बताया गया।
ये रहे शामिल
इस भ्रमण में विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ ज्योति जोशी, डॉ दीपक, डॉ अरविंद यादव, डॉ पूरन जोशी, जितेंद्र सहित विभाग के विद्यार्थी शामिल रहे।