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अल्मोड़ा: ऐतिहासिक व‌ विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम: 2500 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की शांत और खूबसूरत वादियों में घने देवदार के जंगलों के बीच देवाधिदेव महादेव को समर्पित ‘श्री जागेश्वर महादेव मंदिर’ विराजमान है। देश दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की यहां भीड़ उमड़ती है।

सीएम ने साझा की वीडियो

सदियों पुराना यह पावन धाम न सिर्फ धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है, बल्कि अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर इस मंदिर का वीडियो साझा करते हुए इसका पौराणिक इतिहास साझा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर मंदिर का मनमोहक वीडियो पोस्ट किया है. कैप्शन में उन्होंने लिखा, “अल्मोड़ा जिले के घने देवदार के जंगलों के बीच बसा, देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्री जागेश्वर महादेव मंदिर, एक बहुत ही मनमोहक तीर्थस्थल है, जो लाखों भक्तों की अटूट आस्था का एक बड़ा केंद्र है. अपनी दिव्यता, आध्यात्मिक ऊर्जा और पुरानी वास्तुकला के लिए मशहूर मंदिर का जिक्र कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जिसमें स्कंद पुराण भी शामिल है… श्रावण के पवित्र महीने में देवभूमि उत्तराखंड की अपनी यात्रा के दौरान श्री जागेश्वर महादेव के दर्शन का पुण्य जरूर पाएं।”


​लगभग 2500 साल पुराना है इतिहास

​अल्मोड़ा जिले में जटा गंगा नदी के किनारे बसा ‘श्री जागेश्वर महादेव मंदिर’ लगभग 2500 साल पुराना माना जाता है।‌स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण मुख्य रूप से गुप्त काल के बाद और मध्यकाल से पहले कत्यूरी राजाओं द्वारा किया गया था। ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर प्राचीन काल में सप्तऋषियों ने लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। 8वीं शताब्दी में केदारनाथ जाने से पहले आदि गुरु शंकराचार्य ने यहां आकर ध्यान लगाया था और इन मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया था। इस मंदिर की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के बाल रूप की पूजा की जाती है, जिन्हें ‘बाल जागेश्वर’ कहा जाता है।

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