अल्मोड़ा: मई का महीना है। जिसमें तेजी से गर्मी में इजाफा हो रहा है। ली इस गर्मी के सीजन में पहाड़ों के सबसे पसंदीदा और रसीले फल ‘काफल’ ने अल्मोड़ा के बाजारों में दस्तक दे दी है।
लोगों को लुभा रहा काफल
खास बात यह है कि इस बार बाजार में कदम रखते ही काफल के भाव आसमान छू रहे हैं। वर्तमान में यह पहाड़ी फल सेब और आम के दामों से दोगुने से भी अधिक यानी 400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इसके बावजूद, स्थानीय लोगों से लेकर पर्यटकों तक, हर कोई इसके लाजवाब स्वाद का दीवाना हो रहा है।
अमूनन काफल हर साल अप्रैल के मध्य तक बाजारों में आ जाता था, लेकिन इस बार मौसम के मिजाज के कारण यह मई के पहले सप्ताह में बाजार पहुंचा है। इन दिनों अल्मोड़ा के बाजारों में लमगड़ा, जैंती और स्याही देवी समेत विभिन्न ग्रामीण इलाकों से लोग काफल बेचने पहुंच रहे हैं। ऊंचे दामों के बाद भी लोग इस मौसमी फल का स्वाद चखने से पीछे नहीं हट रहे हैं। सैलानी यहां पहुंचकर ताजे और रसीले काफलों का लुत्फ उठाए बिना वापस नहीं लौट रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों के ठंडे इलाकों में होने वाला यह फल अपनी अनूठी खटास और मिठास के लिए प्रसिद्ध है।
स्वाद ही नहीं, सेहत का भी खजाना काफल
काफल सिर्फ जुबान का जायका ही नहीं बदलता, बल्कि आयुर्वेद और सेहत के लिहाज से भी इसे बेहद गुणकारी माना जाता है। काफल में कैल्शियम, जिंक, फास्फोरस, विटामिन सी और भारी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। यह पेट से जुड़ी कई समस्याओं और विकारों के इलाज में बेहद फायदेमंद माना जाता है। डायबिटीज (मधुमेह) और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी लाभकारी है। वैज्ञानिक भाषा में काफल को ‘मिरिका एक्सकुलेंटा’ कहा जाता है। यह मुख्य रूप से हिमालय के निचले और उच्च पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगता है। गर्मी के मौसम में होने वाला यह फल देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी खास पहचान रखता है। इसके फल के अलावा, इसके पेड़ की छाल का उपयोग चर्मशोधन (टैनिंग/चमड़ा साफ करने) के लिए भी किया जाता है।