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अल्मोड़ा: अल्मोड़ा में बिजली के प्रीपेड मीटर लगाने की योजना नहीं चढ़ पाई परवान

अल्मोड़ा में बिजली चोरी रोकने और अनावश्यक खर्च पर अंकुश लगाने के लिए जिले में प्रीपेड मीटर लगाए जाने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। आलम यह है कि दो साल पहले विभाग को मिले 50 स्मार्ट प्रीपेड मीटर गोदाम में धूल फांक रहे हैं। इससे आज भी खासकर सरकारी कार्यालयों से बकाया वसूली ऊर्जा निगम के लिए सिरदर्द बनी है।

पहले चरण में सरकारी कार्यालयों और अस्थाई कनेक्शन में लगाने की थी योजना:

दरअसल, अनावश्यक बिजली खर्च रोकने के लिए विभाग की ओर से प्रीपेड मीटर लगाने की योजना शुरू की गई है। पहले चरण में सरकारी भवनों और अस्थाई कनेक्शनों में मीटर लगाने की योजना थी। इसके लिए विभाग को दो साल पूर्व 50 स्मार्ट प्रीपेड मीटर मिले, लेकिन अब इसे विभागीय सुस्ती कहे या कुछ और दो साल बाद भी जिले में एक भी प्रीपेड मीटर नहीं लगाया गया है।

दो सालों से 50 प्रीपेड मीटर गोदाम में फांक रहे हैं धूल:

आलम यह है कि दो सालों से यह मीटर गोदाम में धूल फांक रहे हैं। इस कारण आज भी सरकारी कार्यालयों से बकाया वसूलना विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

बकाए की वसूली के झंझट से भी मिलती है मुक्ति:

अल्मोड़ा में ऊर्जा निगम का विद्युत बिल का सरकारी विभागों पर लाखों रुपये प्रतिवर्ष बकाया रहता है। राजकीय विभाग बजट के अभाव में वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर भी बिजली बिल के बकाए का भुगतान नहीं कर पाते हैं। यदि सरकारी विभागों में प्रीपेड मीटर लग जाएंगे तो उन्हें अपनी बिजली खपत के अनुसार पूर्व में ही राशि यूपीसीएल के पास जमा करनी होगी।

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