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अल्मोड़ा: सिंचाई योजनाएं ठप होने से हजारों नाली कृषि भूमि बंजर, किसानों का भविष्य दांव पर

भैंसियाछाना (अल्मोड़ा): जनपद अल्मोड़ा के विकास खंड भैंसियाछाना के अंतर्गत ग्राम सभा लिंगुड़ता और डुँगरलेख में पिछले कई वर्षों से सिंचाई योजनाएं ध्वस्त पड़ी हैं।


की यह मांग


बताया कि स्थिति यह है कि पानी के अभाव में हजारों नाली उपजाऊ जमीन बंजर होने की कगार पर है। इस गंभीर समस्या को लेकर जिला पंचायत सदस्य (क्षेत्र-44, सल्ला भाटकोट) शैलजा चम्पाल ने जिलाधिकारी अल्मोड़ा को पत्र लिखकर लघु सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। शैलजा चम्पाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि लघु सिंचाई विभाग, अल्मोड़ा को कई बार सूचना देने के बावजूद बजट के अभाव का बहाना बनाया जाता रहा है। उन्होंने विभाग की प्राथमिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर विभाग बजट की कमी का रोना रोता है, वहीं दूसरी ओर नदी किनारे उबड़-खाबड़ भागों में ‘चेकडैम’ बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पत्र में तीन प्रमुख योजनाओं का विवरण दिया गया है जो वर्तमान में पूरी तरह ध्वस्त हैं। इसमें

• ​लिंगुड़ता-मंगलता सिंचाई योजना: पाइप लाइन ध्वस्त होने के कारण लगभग 2000 से 3000 नाली कृषि भूमि प्रभावित है।

• ​रैमत-लिंगुड़ता सिंचाई योजना (गुल): इसके ध्वस्त होने से लगभग 700 से 800 नाली भूमि को पानी नहीं मिल पा रहा है।

• ​पार की टानी सिंचाई योजना (डुँगरलेख): गुल (नहर) ध्वस्त होने के कारण करीब 500 नाली भूमि प्यासी है।


किसानों को हो रहा आर्थिक नुकसान


​बताया कि क्षेत्र के हजारों किसान अपनी जमीनों को बंजर रखने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। निराश किसानों के सामने अब कृषि छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बच रहा है। जिला पंचायत सदस्य ने चेतावनी दी है कि यदि इन सिंचाई योजनाओं को जल्द सुचारू नहीं किया गया, तो क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो जाएगी। साथ ही जिलाधिकारी से मांग की है कि इन ध्वस्त योजनाओं की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए तत्काल आवश्यक निर्देश दिए जाएं ताकि किसानों को राहत मिल सके।


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