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कठिन राहें, अटल आस्था: नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा: जयकारों के बीच कैलाश की ओर बढ़ रही नंदा राजजात, नंदा देवी की डोलियों का जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

उत्तराखंड: उत्तराखंड में हिमालयी महाकुंभ के रूप में विख्यात मां नंदा की ‘बड़ी जात यात्रा’ जारी है। उत्तराखंड के चमोली में आयोजित हो रही ऐतिहासिक ‘श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा’ की तीनों देव डोलियां (जिन्हें स्थानीय तौर पर और बोलचाल में ‘तीनों डोलियां’ कहा जाता है) अपने अगले पड़ावों की ओर निरंतर बढ़ रही हैं।

भक्तिमय हुआ क्षेत्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश धाम के लिए शुरू हुई ‘श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात यात्रा’ में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। यात्रा में शामिल माँ नंदा की तीनों देव डोलियां भव्य स्वागत के बीच अपने-अपने पड़ाव पर आगे बढ़ रही हैं। यात्रा मार्ग, गांवों और कस्बों में श्रद्धालुओं द्वारा देव डोलियों का भव्य और पारंपरिक स्वागत किया जा रहा है। भक्तों ने काकड़ी, मुगरी, कलेऊ और खाजा सहित स्थानीय स्तर पर उत्पादित अन्य सामग्री भेंट और पवाड़ा के रूप में माँ नंदा को अर्पित की जा रही है। इस दौरान देव डोलियों के साथ चल रहे चार सींगों वाले ‘चौसिंगा खाड़ू’ भी भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

रात्रि जागरण का आयोजन

​नंदा धाम कुरुड़ से शुरू हुई मां नंदा देवी की तीनों डोली यात्राएं अपने तय पड़ावों से होकर कैलाश की ओर लगातार आगे बढ़ रही हैं। उबड़-खाबड़ रास्तों, गदेरों और नालों की परवाह किए बिना हजारों देवी भक्त अगाध आस्था और भारी उत्साह के साथ डोलियों की अगवानी कर रहे हैं। बुधवार को बधाण की नंदा देवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली नंदानगर (घाट) के भेंटी, स्यारी और बंगाली होते हुए पिंडर घाटी के थराली विकासखंड स्थित सोल डुंग्री पहुंची। करीब 15 किलोमीटर के कठिन मार्ग को पार कर पहुंची यात्रा का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया और रात्रि जागरण का आयोजन किया।

अलग-अलग पड़ावों से आगे बढ़ रहीं डोलियां

• ​बधाण की नंदा देवी: गुरुवार को यह डोली करीब 12 किलोमीटर की दूरी तय कर डुंग्री से केरा-मेन होते हुए सूना गांव पहुंचेगी, जहां कालरात्रि पूजन और रात्रि जागरण होगा।
• ​बंड दशोली की नंदा यात्रा: 16 किलोमीटर की यात्रा तय कर 5वें पड़ाव कम्यार गांव पहुंची है। यह यात्रा आज कम्यार से किरोली गांव पहुंचेगी, जहां देव पूजन आयोजित होगा।
• ​दशोली की नंदा डोली: करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर अपने 5वें पड़ाव मटई ग्वाड़ गांव पहुंच चुकी है। गुरुवार को यह 25 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर छठे पड़ाव पगना गांव पहुंचेगी।

नंदा राजजात यात्रा

सिद्धपीठ में पांच दिनों तक चले विशेष पूजा-अर्चना के बाद जैसे ही मां नंदा देवी की डोली यात्रा के लिए निकली, पूरा क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ के उद्घोष से गूंज उठा। जानकारी के अनुसार इस ऐतिहासिक विदाई के पल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस धार्मिक यात्रा की अगुआई चौसिंग्या खाडू (चार सींग वाला मेढ़ा) कर रहा है। उसे 20 सितंबर को होमकुंड में देवी नंदा के साथ कैलास के लिए विदा किया जाएगा।

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