October 22, 2021

प्रो० पी ०डी० भट्ट एस्एसजे विवि अल्मोड़ा द्वारा कहा गया-कोरोना से डरें नहीं मुकाबला करें । “सकारात्मक सोच ही कर सकती आपको जल्दी स्वस्थ्य” …

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कोरोनाकाल में सकारात्‍मक सोच ला सकती हैं पसंदीदा किताब

अल्मोड़ा। कोरोना काल में सकरात्मक सोच ही आपको बचा सकती है। इंसान जैसा सोचेगा, वैसा ही होगा। अल्मोड़ा एसएसजे विवि के मनोविज्ञान विभाग के प्रो. पीडी भट्ट ने कहा कोरोना पॉजिटिव मरीज को किसी भी तरह से अपने अंदर नकारात्मक सोच को नहीं आने देना चाहिए। इसके लिए जरुरी है की व्यक्ति अपने मन मे सकारात्मक सोच लाये ।

मनोशक्ति है महत्वपूर्ण ।

उन्होंने कहा कि इसके लिए बाहरी स्पोर्ट की जरूरत है, लेकिन मनोशक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण है। मन और दिमाग में किसी भी तरह से नकारात्मक सोच नहीं आए, इसके लिए इंसान को अपनी पसंद के काम करने होंगे।

नकारात्मक सोच से कैसे बचें ?

उन्होंने कहा की कोरोना पॉजिटिव आने पर मनपसंद की किताबें पढ़कर नकारात्‍मक सोच से बचा जा सकता है। कहा कि कोरोना काल सकारात्मता से जीने का है। इसमें सोच ही आपकों जल्द ठीक कर सकती है। मोबाइल कंप्यूटर में नेट की सुविधा है। अस्पताल में भी हैं तो मोबाइल पर सब सुविधा है। अपनी पसंद की किताबें पढ़ सकते हैं। फिल्में देख सकते है। मोटिवेशन भाषण सुन सकते हैं। ये सभी मरीज की सोच को सकारात्मक रखने में मदद करेंगी।