आज 20 अगस्त 2026 है। आज विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता है। विश्व मच्छर दिवस हर साल 20 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन ब्रिटिश डॉक्टर सर रोनाल्ड रॉस द्वारा 1897 में की गई उस खोज की याद में मनाया जाता है, जिसमें उन्होंने पता लगाया था कि इंसानों में मलेरिया फैलाने वाले मादा एनोफिलीस मच्छर होते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी जरूरी
ब्रिटिश चिकित्सक, सर रोनाल्ड रॉस ने साल 1897 में 20 अगस्त को मादा एनाफिलीज मच्छर की खोज की थी, जो मलेरिया जैसी घातक बीमारी का कारण है। इसके बाद से हर साल इस दिन को पूरी दुनिया में विश्व मच्छर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों और उनसे बचाव के तरीकों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के सुचारू रूप से संचालित होने में मच्छरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर हम मच्छरों को पूरी तरह से खत्म करने की कोशिश करेंगे तो उससे हमारा पारिस्थितिक संतुलन खराब हो सकता है। मच्छर कईं अन्य जीवो का भोजन हैं, इसलिए अगर हम मच्छरों के पूरी तरह से खत्म करने की कोशिस करेंगे तो कई अन्य जीवों के लिए भोजन का संकट उत्पन्न हो सकता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र गड़बड़ा जाएगा। इसलिए वैज्ञानिक मच्छरों को पूरी तरह से खत्म करने के बजाय उनके प्रजनन को नियंत्रित करने और उनसे होने वाली बीमारियों को ठीक करने के उपायों पर जोर देते हैं।
जानें इसका इतिहास
हर साल 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाने की शुरूआत साल 1930 से हुई थी। इसकी शुरूआत लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन द्वारा की गई थी। यह दिवस साल 1897 में ब्रिटिश डॉक्टर सर रोनाल्ड रॉस द्वारा मादा एनोफिलीज मच्छरों की ऐतिहासिक खोज का प्रतीक भी है। डॉक्टर रॉस ने ही सबसे यह पता लगाया था, कि मादा एनोफिलीज मच्छर, मलेरिया को फैलाने के लिए जिम्मेदार परजीवी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं। सर रोनाल्ड रॉस को अपनी इस महान खोज के लिए चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।
मच्छरों से खतरा
मच्छर दुनिया के सबसे घातक कीटों में से एक हैं। इनमें मनुष्यों के अंदर रोगों को संचारित और प्रसारित करने की क्षमता होती है। इसी कारण मच्छरजनित रोगों से दुनिया में हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। मच्छर कई प्रकार के होते हैं, और ये मनुष्यों में कई प्रकार के रोगों का संवाहन कर सकते हैं।
एनोफेलीज – मलेरिया, लिम्फेटिक फाइलेरिया (कुछ देशों में)।
एडीज – चिकनगुनिया, डेंगू बुखार, पीला बुखार (पीत ज्वर), जीका, लिम्फेटिक फाइलेरिया, रिफ्ट वैली बुखार।
क्यूलेक्स – लिम्फेटिक फाइलेरिया, जापानी इन्सेफेलाइटिस, वेस्ट नाइल फीवर।