बागेश्वर: बागेश्वर में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर जौलकांडे गांव इन दिनों पक्षियों की चहचहाहट और युवाओं के सीखने के उत्साह से गुलजार है। यहाँ आयोजित एडवांस बर्ड वॉचिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों ने न केवल दुर्लभ पक्षियों को करीब से देखा, बल्कि एक पेशेवर गाइड बनने के लिए आवश्यक ‘सॉफ्ट स्किल्स’ का पाठ भी पढ़ा।
गाइड बनने के गुर
प्रशिक्षण का दूसरा दिन ज्ञानवर्धक गतिविधियों से भरा रहा। विशेषज्ञों ने इनडोर सत्रों में छात्र-छात्राओं को पक्षियों की पहचान करने की बारीकियां सिखाईं। सत्र के दौरान पक्षियों का व्यवहार और उनका प्राकृतिक आवास, माइग्रेशन पैटर्न (प्रवास चक्र) की समझ, बर्ड वॉचिंग की उन्नत तकनीकें और उपकरणों का प्रयोग किया। प्रशिक्षण का सबसे रोमांचक हिस्सा आउटडोर सत्र रहा। eBird चेकलिस्ट के अनुसार, जौलकांडे के जंगलों में प्रतिभागियों ने लगभग 30 से अधिक प्रजातियों का अवलोकन किया।
दी यह जानकारी
जिसमें हिमालयन ब्लैक बुलबुल, ओरिएंटल टर्टल डव, एशियन बार्ड ऑउलेट, स्कारलेट मिनीवेट, और रेड-बिल्ड ब्लू मैग्पाई जैसे खूबसूरत पक्षी आकर्षण का केंद्र रहे। पक्षियों के साथ-साथ छात्रों ने स्थानीय वनस्पतियों (प्लांट स्पीशीज) और पारिस्थितिकी तंत्र में उनके महत्व को भी समझा। इसी उद्देश्य से समर्पित मीडिया सोसाइटी के पंकज शर्मा ने विशेष सत्र लिए। इसमें युवाओं को संवाद कौशल, आत्मविश्वास और प्रस्तुति शैली, सफल गाइड बनने के गुण के बारे में विस्तार से बताया गया। बताया कि यह प्रशिक्षण युवाओं को इको-टूरिज्म के क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करेगा और जौलकांडे को एक प्रमुख ‘बर्ड वॉचिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में पहचान दिलाएगा। प्रशिक्षण का सफल संचालन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता राजेश भट्ट और प्रसिद्ध बर्ड वॉचर राजीव बिष्ट द्वारा किया जा रहा है।