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बागेश्वर: विकास कार्यों में अब रोड़ा नहीं बनेगी वन भूमि, डीएम ने लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश




बागेश्वर: बागेश्वर जनपद में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में फंसे विकास कार्यों को गति देने के लिए जिला प्रशासन सख्त हो गया है। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक कर निर्देश दिए कि सड़क और पेयजल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लंबित मामलों का आपसी समन्वय से तत्काल समाधान निकाला जाए।


बैठक का आयोजन


​जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने स्तर पर बैठकें कर क्षतिपूरक वनीकरण (CA) के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं के लिए भूमि आवंटन में देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, जिन विभागों की योजनाएं निरस्त हो चुकी हैं या जिनका एलाइनमेंट छोटा हो गया है, उन्हें आवंटित अतिरिक्त भूमि वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। प्रकरणों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एक समर्पित कार्मिक तैनात करने का आदेश दिया है। यह कर्मचारी प्रतिदिन लंबित प्रस्तावों की प्रगति की निगरानी करेगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को शासन, नोडल और केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित प्रस्तावों का निरंतर फॉलोअप करने और आपत्तियों का तत्काल निराकरण करने के भी निर्देश दिए।


​दिए यह निर्देश


​बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आदित्य रत्ना ने जनपद की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी (PWD), पीएमजीएसवाई (PMGSY) और पेयजल निगम के कुल 43 प्रस्ताव वर्तमान में विभिन्न चरणों में हैं। जिसमें 23 प्रस्ताव संबंधित विभाग के स्तर पर लंबित, 15 प्रस्ताव नोडल स्तर पर प्रक्रियाधीन, 04 प्रस्ताव वन विभाग के पास, 01 प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित है।


रहें उपस्थित


​बैठक में अपर जिलाधिकारी एन. एस. नबियाल सहित जनपद के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।

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