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चंद्रयान-3 को लेकर कभी भी आ सकती है बड़ी जानकारी, जानें इससे जुड़ा नया अपडेट

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। भारत का मिशन चंद्रयान-3 से जुड़ी खबर सामने आई है। चंद्रमा पर सूर्योदय हुए तीन दिन बीत चुके हैं। लेकिन अब तक चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर स्लिप मोड पर है।

चंद्रयान-3 से जुड़ी खबर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बताया गया है कि इन दोनों ने फिर से काम करना नहीं शुरू किया है। दोनों अभी तक स्लीप मोड में हैं, जिनको लेकर उम्मीद की जा रही थी कि शुक्रवार को दोनों फिर से जग सकते हैं। दोनों मॉड्यूल्स को इस महीने की शुरुआत में चांद पर रात होने के चलते स्लीप मोड में डाल दिया गया था और चमत्कार की उम्मीद की जा रही थी कि जब चांद पर फिर से उजाला होगा तो दोनों सूर्य की रोशनी से चार्ज होकर फिर से सिग्नल भेजने लगेंगे। हालांकि, शनिवार रात तक ऐसा नहीं हो सका है।

जानें क्या है तकनीकी पहलू

रिपोर्ट्स के मुताबिक इसरो की ओर से लैंडर के ऑनबोर्ड कंप्यूटर में सबसे पहले कम्युनिकेशन कमान भेजे जाएंगे। अगर लैंडर और रोवर की बैटरी फिर से चार्ज हो रही होगी तो इसरो के कमान का तत्काल रिस्पांस इन यंत्रों से तुरंत धरती के कमांड सेंटर पर मिलेगा।‌इसके बाद विक्रम और प्रज्ञान की तकनीकी स्थिति का आंकलन किया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो दोबारा चांद की धरती पर वन लूनर डे यानी धरती के 14 दिनों तक प्रज्ञान के पेलोड्स के जरिए चांद की मिट्टी और भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन शुरू होगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि विक्रम और प्रज्ञान दोबारा काम करना शुरू कर सकते हैं।

इसरो के चेयरमैन ने कहीं यह बात

रिपोर्ट्स के मुताबिक इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने बताया है कि अब तक कोई भी सिग्नल नहीं मिला है, लेकिन मैं यह नहीं कह सकता कि यह नहीं आएंगे। पूरे लूनर डे (पृथ्वी के दिन के हिसाब से 14 दिन) तक इंतजार करेंगे, क्योंकि तब तक सूर्य की रोशनी लगातार पड़ती रहेगी, जिसका मतलब है कि तापमान में बढ़ोतरी होगी।” उन्होंने आगे बताया कि जब तक तापमान बढ़ रहा है तब तक अंदर सिस्टम के गर्म होने की संभावना है। इसलिए सिस्टम 14वें दिन भी जाग सकता है, यह कब हो सकता है, इसकी भविष्यवाणी करने का कोई तरीका नहीं है।”

14 जुलाई को हुआ था लांच

दरअसल चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान (Chandrayaan 3) को भारत के हेवी लिफ्ट रॉकेट एलवीएम3 द्वारा कॉपीबुक शैली में 14 जुलाई, 2023 को कक्षा में स्थापित किया गया था। 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरने वाला चंद्रयान-3 अपनी 40 दिनों की लंबी यात्रा के बाद 23 अगस्त को शाम 6:04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास 70 डिग्री अक्षांश के पास उतरा।

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