January 27, 2022

कैच द रेन अभियान: देशभर में वर्षा जल संचयन को लेकर जमीनी स्तर पर किये जा रहे हैं प्रयास

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देश में हर साल वर्षा जल के रूप में अथाह जल उपलब्ध होता है, लेकिन बेहतर प्रबंधन न होने के कारण इसका समुचित उपयोग नहीं हो पाता और जल बर्बाद हो जाता है। इसी के मद्देनजर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने जल शक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ की शुरुआत की है, जिसके तहत गांव और शहरों में वर्षा जल संचयन को लेकर जमीनी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

बरसात के चार महीनों में देश में सबसे महत्वपूर्ण अभियान

’22 मार्च 2021′ को विश्व जल दिवस के अवसर पर देशभर में जलशक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ का शुभारंभ किया गया था। याद हो, उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री‚ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के मध्य केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) को लागू करने हेतु एक ऐतिहासिक समझौता भी हस्ताक्षरित हुआ था। यह नदियों को आपस में जोड़ने की राष्ट्रीय स्तर की अपनी तरह की पहली परियोजना है।

‘कैच द रेन’ अभियान का क्या है उद्देश्य ?

इस अभियान को जमीनी स्तर पर लोगों की सहभागिता से देश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु एक जन आंदोलन के रूप में शुरू किया गया है। मकसद है, जहां कहीं संभव हो वर्षा जल का संरक्षण किया जाए। बरसात के चार महीनों में देश में सबसे ज्यादा वर्षा होती है। ऐसे में जरूरत है कि वर्षा जल के रूप में मिलने वाली अथाह जलराशि का संग्रहण किया जा सके। इसके लिए नेहरू युवा संगठन के पहले ही प्रयास किए गए थे, जिसका असर भी अब देखा जा सकता है।

वर्षा जल संरक्षण के लिए बन रही आधारभूत संरचनाएं

2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 7,000 ब्लॉक और तमाम जिलों में इस अभियान को शुरू किया गया है। ग्राम स्तर पर 13 लाख 94 हजार 440 रुपए की कुल लागत से अब तक 7 लाख 35 हजार 534 कार्यों को पूरा किया जा चुका है, जबकि 5 लाख 26 हजार 647 काम अभी जारी है, जिसमें से गांव में जल संरक्षण और वर्षा संचयन के 1 लाख 64 हजार 466 काम पूरे हो चुके हैं और 1 लाख 82 हजार 176 काम जारी हैं। 37 हजार, 428 जल निकायों के जीर्णोद्धार का काम किया जा चुका है, जबकि 42 हजार 25 काम अभी बाकी हैं। 2 लाख 60 हजार वाटरशेड विकास का काम पूरा हो चुका है, जबकि 1 लाख 71 हजार 114 पर काम जारी है।

देश में बनाए जा रहे 11 से 12 लाख वर्षा जल संचयन इंफ्रास्ट्रक्चर

राष्ट्रीय जल मिशन परियोजना निदेशक जी. अशोक कुमार बताते हैं कि देश में अभी व्यापक स्तर पर काम हो रहे हैं। देश में करीब 11 से 12 लाख वर्षा जल संचयन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। आज कल पार्क और रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम हो रहा है।

पहली बार शहरों में शुरू की गई यह योजना 

पहली बार इस योजना को शहरों में शुरू किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक 516 जल निकायों का जीर्णोद्धार हो चुका है। 57 हजार 992 दशमलव 85 केएलडी दूषित जल का शोधन किया जा चुका है। 1258 आरडब्ल्यूएच संरचनाओं का जीर्णोद्धार हुआ है जबकि 1 लाख 23 हजार 90 आरडब्ल्यूएच संरचनाओं का निर्माण किया गया है।

कोविड काल में जमीनी स्तर पर खड़ा किया जलशक्ति अभियान

कुल मिलाकर इस बार कोविड 19 संक्रमण से सामूहिक लड़ाई के बीच भी जलशक्ति अभियान जमीनी स्तर पर खड़ा करने में जुटा रहा। ग्रामीण और शहरी दोनों स्तर पर वर्षा जल संरक्षण के लिए नई संरचनाएं खड़ी की जा रही हैं ताकि भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए तैयार हुआ जा सके और भूमिगत जल स्तर में भी बढ़ोतरी हो।