October 26, 2021

नैनीताल में बनाये जा रहे भूकंपरोधी घर, विदेशों से भी आ रहे लोग यह तकनीक सीखने

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पहाड़ो में समय- समय पर भूकंप आते रहते हैं और इस आपदा से न जाने कितने लोग अपनी जान गवां देते हैं ।  इन सभी समस्याओं को देखते हुए बिहार निवासी शगुन नैनीताल जिले में भूकंपरोधी घर बना रही है । यह घर दिखने में जितने अधिक आकर्षक हैं उतने ही मजबूत और  टिकाऊ भी हैं ।

उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील  राज्य माना जाता हैं

उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से हमेशा अति संवेदनशील  रहा है। आने वाले वक्त में यहां बड़े भूकंप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील जोन पांच और संवेदनशील जोन चार में आता है। अति संवेदनशील जोन पांच की बात करें तो इसमें रुद्रप्रयाग जिले के अधिकांश भाग के अलावा बागेश्वर, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिले आते हैं। वहीं जो क्षेत्र संवेदनशील जोन चार में हैं उनमें ऊधमसिंहनगर, नैनीताल, चंपावत, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा जिला शामिल है। देहरादून और टिहरी का क्षेत्र दोनों जोन में आता है। भूकंप, से आने वाली असमय आपदा से हज़ारों लोगो को नुकसान पहुंचता है न जाने कितने लोग मकान के नीचे दब के अपनी जान गंवा देते हैं ।

आइये जानते हैं इन घरों की विशेषताएं

नैनीताल ज़िले के दूरस्थ गांव महरोड़ा में गीली मिट्टी एनजीओ के तहत काम कर रही बिहार निवासी शगुन सिंह महरोड़ा गांव में भूकंपरोधी घर बना रही हैं। उन्होंने मिट्टी और लकड़ी से निर्मित भूकंपरोधी घर बनाए गए हैं। भूकंपरोधी घरों को नेचुरल हाउस नाम दिया गया है ।क्योंकि यह सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडे होते हैं। पहाड़ों पर आने वाली आपदा को देखते हुए अर्थ बैग, कॉब, एडोबी, टिंबर फ्रेम, लिविंग रूम तकनीक से उन्होंने विभिन्न प्रकार के घर बनाये  हैं । ये घर हल्की तीव्रता वाले भूकंप सह सकते हैं। अगर भूकंप आ भी जाए तो जान -माल की हानि नहीं होगी । यह वर्ष 1991 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आए भीषण भूकंप में हुई भयंकर तबाही को देखते हुए बनाये गए हैं । जब उत्तरकाशी में भूकंप आया था तो वहां पर सीमेंट, ईट, रेट के सभी घर तबाह हो गए थे जबकि मिट्टी ओर पत्थर से बने घर सुरक्षित थे ।

अन्य देश भी सीखना चाहते यह तकनीक

देश के साथ- साथ अन्य देश के लोग भी इस तकनीक को बेहतर मान रहे हैं । अभी तक इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया अमेरिका, फ्रांस, इटली, जर्मनी, मेक्सिको, जापान और पड़ोसी देश नेपाल सहित करीबन 12 देशों के लोग भूकंपरोधी घर बनाने की तकनीक को सीखने के लिए नैनीताल आ चुके हैं।