May 28, 2022

इवनिंग स्पेशल: जानें आज के दिन जन्में भारतीय खुफिया एजेंसी के पहले मास्टर स्पाई के बारे में, और इनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

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भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानि कि रॉ (RAW) के पहले प्रमुख और भारत के मास्टरस्पाई के नाम से मशहूर “आर. एन. काव” या रामेश्वर नाथ काव का आज जन्मदिन है। 10 मई 1918 को जन्मे रामेश्वर नाथ काव के दिमाग और कुशल रणनीति की वजह से ही भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को पूरी दुनिया में एक अलग पहचान और कामयाबी मिली। दरअसल, काव ही वे पहले व्यक्ति रहे, जिन्होंने रॉ को एक प्रोफेशनल खुफिया एजेंसी में तब्दील किया। उन्होंने न सिर्फ भारत के राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया, बल्कि भारत की इस एजेंसी को भविष्य के लिए एक सुरक्षित दिशा और दशा भी प्रदान की।

आई.बी.से रॉ के निदेशक बनने तक का सफर

काव का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया और 1939 में भारतीय पुलिस सेवा की परीक्षा पास करके इसमें शामिल हो गए। सर्विस जॉइन करने के 8 साल बाद सन 1947 में जब देश में इंटेलिजेंस ब्यूरो की स्थापना हुई, तब काव को वहां भेजा गया। काव ने आईबी में बतौर सहायक निदेशक जॉइन किया था। उस दौरान, काव को देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद साल 1968 में भारत में भी देश के बाहर के खुफिया मामलों के लिए एक एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) बनाने का फैसला लिया गया और काव को इसका पहला निदेशक बनाया गया।

जब महारानी ने की काव की तारीफ

साल 1950 में ब्रिटिश महारानी के भारत में पहले दौरे के दौरान काव को उनकी सुरक्षा प्रभार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस दौरान एक कार्यक्रम में काव ने अपनी काबिलियत और शानदार बुद्धि तत्परता का परिचय देते हुए महारानी की ओर फेंके गए एक बुके को पकड़ लिया था। जिसके बाद महारानी ने उनकी काबिलियत की तारीफ करते हुए “गुड क्रिकेट” बोला था।

कई पुस्तकें भी लिखी गई

काव ने रॉ के निदेशक के रूप में करीब दस वर्ष (1968 से 1977) तक अपनी सेवाएं दीं। साल 1976 में इंदिरा गाँधी ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने का निर्णय लिया और उसके बाद काव को केंद्रीय कैबिनेट के सुरक्षा सलाहकार (असल में, पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) नियुक्त किया गया। इसके बाद वे तत्कालीन प्रधानमंत्री (राजीव गाँधी) को सुरक्षा के मामलों और विश्व के खुफिया विभाग के अध्यक्षों से संबंध स्थापित करने में विशेष सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं देते रहे।

काव के जीवन और उनकी कार्यशैली पर लिखी गई कई पुस्तकें
  
काव के जीवन और उनकी कार्यशैली पर कई पुस्तकें भी लिखी गई हैं, जिनमें आर एन काव-जेंटलमैन स्पाईमास्टर, काउबॉयस ऑफ R&AW, रॉ-भारतीय गुप्तचरसंस्थेची गूढगाथा, ए लाइफ इन सीक्रेट, इस्केप टू नो व्हेयर और टीम ऑफ काउबॉयज शामिल हैं।

काव से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

1) काव ने भविष्य की सुरक्षा चिंताओं से निबटने के लिए पॉलिसी एंड रिसर्च स्टाफ की नींव रखी थी।

2)काव ने तत्कालीन बांग्लादेशी राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान को चेतावनी दी कि बांग्लादेश के कुछ सैन्य अधिकारी उनके खिलाफ तख्तापलट की साजिश रच रहे थे।

3)1950 के दशक के मध्य में काव ‘कश्मीर प्रिंसेस’ की जाँच और 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति में योगदान जैसे मामलों से जुड़े थे।

4( काव ने रॉ दो पीढ़ियों को जासूसी के गुण सिखाये, उनकी टीम को काव ब्वॉयज कहा जाता था।

5) काव भारत के तीन प्रधानमंत्रियों के करीबी सलाहकार और सुरक्षा प्रमुख थे।

6) वे 1962 में चीन के साथ भारत के संघर्ष के बाद स्थापित हुए सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएस) के संस्थापकों में से एक थे।

7) 1950 के दशक में उन्होंने पंडित नेहरू के अनुरोध पर घाना की खुफिया एजेंसी (विदेशी सेवा अनुसंधान ब्यूरो) के गठन में मदद की थी।

8) काव के कुशल नेतृत्व और उनकी टीम की कुशल रणनीति की वजह से 3000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का भारत में विलय कराया गया और सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना।

जॉइंट इंटेलिजेंस कमिटी के चेयरमैन के. एन. दारुवाला द्वारा लिखा गया ये नोट आर. एन. काव को सही रूप से चित्रित करता है

“दुनियाभर में उनके संपर्क कुछ अलग ही थे, खासकर एशिया, अफगानिस्तान, चीन और ईरान में। वे सिर्फ एक फोन लगा कर काम करवा सकते थे। वे ऐसे टीम अध्यक्ष थे जिन्होंने अंतरविभागीय स्पर्धा, जो कि भारत में आम बात है, को खत्म कर दिया।” 20 जनवरी 2002 को इनका निधन हो गया। इस दौरान काव ने भारत में आधुनिक आसूचना की नींव रखी जो आज एक महल बनकर हमारे सम्पूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा कर रही है।