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17 फरवरी: आज मनाया जा‌ रहा है द्वापर युग, ज्ञान, अनुष्ठान और तपोमय जीवन का युग, जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में लिया था 8वां अवतार

आज 17 फरवरी 2026 है। आज द्वापर युग दिवस मनाया जाता है। यह आमतौर पर फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। जो आज 17 फरवरी 2026 को है।

द्वापर युग की शुरुआत का प्रतीक

द्वापर युग दिवस (द्वापर युगादि) फाल्गुन कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग की शुरुआत का प्रतीक है। यह वह दिन है जब भगवान कृष्ण का अवतरण हुआ और महाभारत का युद्ध हुआ था। इस दिन उपवास, पूजा, और दान करने से पुण्य फल अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) हो जाता है। इस तिथि पर जप, तप, स्नान और दान का विशेष महत्व है, जो युगादि तिथि होने के कारण अत्यधिक फलदायी माना जाता है। यह युग ज्ञान, अनुष्ठान और तपोमय जीवन का युग माना जाता है, जहाँ नैतिकता और अनैतिकता दोनों साथ रहती थीं। द्वापर युग में ही भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में 8वां अवतार लिया था। 

द्वापर युग

हिंदू शास्त्रों में वर्णित हैं कि द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है और यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया। 

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