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अल्मोड़ा की ऐतिहासिक ताम्र कला को सहेजेगी सरकार, टम्टा मोहल्ला पहुंचे दर्जा राज्य मंत्री पिलख्वाल

अल्मोड़ा: उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा राज्य मंत्री) गोविंद सिंह पिलख्वाल ने रविवार को अल्मोड़ा के ऐतिहासिक टम्टा मोहल्ले का भ्रमण किया।

सुनी जनसमस्याएं

इस दौरान उन्होंने स्थानीय ताम्र हस्तकारों (कॉपर शिल्पकारों) और नागरिकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। इस बैठक में पारंपरिक ताम्र शिल्प को जीवित रखने और शिल्पकारों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें शिल्पकारों के पहचान पत्रों (आर्टिजन कार्ड) के समय पर नवीनीकरण की मांग उठाई गई। कॉपर शिल्प के लिए कच्चे माल की सुगम उपलब्धता और किफायती दरों पर आवश्यक संसाधन मुहैया कराने पर जोर दिया गया। तैयार उत्पादों के लिए बेहतर विपणन (मार्केटिंग) सुविधाएं देने और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ शिल्पकारों तक पहुंचाने की मांग की गई। शिल्पकारों ने अपनी व्यावहारिक दिक्कतों और सुझावों को राज्य मंत्री के सामने खुलकर रखा, जिस पर श्री पिलख्वाल ने संबंधित विभागों के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।


​”ताम्र शिल्प हमारी सांस्कृतिक धरोहर”

​बैठक को संबोधित करते हुए उपाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल ने कहा कि उत्तराखंड की ताम्र शिल्प कला प्रदेश की एक समृद्ध और ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर है। सरकार इस कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है। उन्होंने दोहराया कि शिल्पकारों के हितों की रक्षा करना और उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है।


​रहे उपस्थित

​इस मौके पर स्थानीय पार्षद अमित साह ‘मोनू’, कृष्ण बहादुर सिंह, नीरज सांगा, सुंदर कुमार टम्टा, नरेंद्र कुमार और विक्की सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में ताम्र शिल्पकार उपस्थित रहे।

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