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हल्द्वानी: प्रेरणादायक कहानी: जीवन जोशी को राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित, जिनकी जीवंत कलाकृतियों ने उन्हें दिलाई राष्ट्रीय पहचान

उत्तराखंड के 65 वर्षीय दिव्यांग जीवन जोशी की बागेट कला काफी लोकप्रिय हो गई है। पोलियो से ग्रसित इस दिव्यांग कलाकार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कल 15 अगस्त को दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित करेंगी।

राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम भी कुछ समय पहले अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात पर उत्तराखंड के 65 वर्षीय दिव्यांग जीवन जोशी की बागेट कला की सराहना कर चुके हैं। अब जीवन चंद्र जोशी को एक और उपलब्धि हासिल होने जा रही है। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 15 अगस्त को सम्मानित करने जा रही हैं। जीवन चंद्र जोशी अपनी काष्ठ कला से लकड़ी में जान डालने का काम कर रहे हैं। जीवन चंद्र ने बताया कि वह मूल रूप से अल्मोड़ा जनपद के तल्ला जाखन देवी के रहने वाले हैं। अल्मोड़ा के पहाड़ों पर चीड़ मिली तो उसकी छाल से बनाई कलाकृतियों ने जीवन चंद्र के जीवन को नई राह दिखाई। पिछले दो दशक से वह हल्द्वानी के कटघरिया में रहते हैं, जहां छोटी सी दुकान में कलाकृतियों को तैयार करने का काम करते हैं।

प्रेरणादायक कहानी करेगी प्रेरित

जीवन चंद्र जोशी उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर के कठघरिया क्षेत्र के निवासी हैं। जो एक कुशल काष्ठ शिल्पी होने के साथ-साथ एक संघर्षशील और समर्पित कला साधक भी हैं। जीवन जी हल्द्वानी, उत्तराखंड में रहते हैं। बचपन में पोलियो ने उनके पैरों की ताकत छीन ली, लेकिन पोलियो उनके हौसले को छीन नहीं पाया। जीवन जोशी ने एक अनोखा कला रूप जन्म दिया और इसका नाम रखा ‘बगेट’। इसमें वह उस सूखी छाल से सुंदर कलाकृतियां बनाते हैं जो पाइन के पेड़ों से गिरती है। वही छाल, जिसे लोग आमतौर पर बेकार समझते हैं, जीवन जी के हाथों में आते ही विरासत बन जाती है। कभी वह पहाड़ों के लोक वाद्ययंत्र बन जाती है, तो कभी ऐसा लगता है जैसे पहाड़ों की आत्मा उस लकड़ी में समा गई हो।’ बचपन में पोलियो के कारण उन्होंने अपने पैरों की शक्ति खो दी थी‌। लेकिन हौंसला नहीं खोया। पिछले बीस वर्षों से वे काष्ठ कला के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्होंने अपनी अनूठी कला शैली को ‘बगेट कला’ का नाम दिया है।

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