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ऐतिहासिक फैसला: उत्तराखंड के बाद अब गुजरात विधानसभा में भी पास हुआ ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) बिल, जानें

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं।‌ उत्तराखंड के बाद अब गुजरात देश का ऐसा अगला राज्य बनने जा रहा है जहां समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होगी।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद होगा लागू

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते कल मंगलवार को गुजरात विधानसभा में सात घंटे से अधिक चली लंबी चर्चा और भारी हंगामे के बीच यूसीसी बिल को पास किया गया। सत्ताधारी भाजपा ने इसे ‘ऐतिहासिक सुधार’ बताया है, वहीं कांग्रेस ने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही गुजरात अब गोवा और उत्तराखंड की श्रेणी में शामिल हो गया है। आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं और राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा।

जानेंक्या बदलेगा इस कानून से

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए इस बिल का मुख्य उद्देश्य धर्म-आधारित निजी कानूनों की असमानता को खत्म करना है।
कानून की मुख्य बातें
• ​एक विवाह का नियम: सभी समुदायों के लिए अब केवल एक ही शादी मान्य होगी। बहुविवाह पर रोक लगेगी।
• ​समान तलाक प्रक्रिया: अब तलाक के लिए सभी धर्मों के नागरिकों को अदालत की अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। गैर-न्यायिक तरीकों पर रोक लगा दी गई है।
• ​संपत्ति में समान अधिकार: बेटियों और पत्नियों को विरासत व संपत्ति में समान अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं।
• ​लिव-इन का पंजीकरण: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को स्थानीय अधिकारियों के पास अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
• ​धोखाधड़ी पर सख्ती: पहचान छिपाकर, जबरदस्ती या गलत जानकारी देकर की गई शादियों को अमान्य घोषित किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी।

जानेंकिसे मिली छूट

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस संहिता के दायरे से बाहर रखा गया है। उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और विवाह-विरासत की परंपराओं पर इस कानून का कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस कानून को तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने व्यापक जन-परामर्श किया। सरकार के अनुसार, ईमेल और पोर्टल के जरिए लगभग 20 लाख सुझाव प्राप्त हुए, जिनमें से अधिकांश ने अनिवार्य पंजीकरण और समान अधिकारों का समर्थन किया।


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